गीत ------ एक उजली दृष्टि अंतर मई समाई

13 सितम्बर 2016   |  आलोक सिन्हा   (102 बार पढ़ा जा चुका है)

गीत

कुसुम सिन्हा ( बुलंदशहर )


एक उजली दृष्टि अन्तर में समाई |


बिन बुलाये तीर्थ मेरे द्वार आया ,

बिन छुए पावन हुई है मोह माया ,


एक भोली भावना गंगा नहाई |


फूल से वरदान आंचल में पड़े हें ,

पुण्य के फल सामने आकर खड़े हें ,


एक पल में साधना ने सिद्धि पाई |


बांसुरी अनुभूति की बजने लगी है ,

आत्मा की राधिका सजने लगी है ,


एक मंगल ज्योति मन में जगमगाई |

( काव्य संकलन - - बांसुरी अनुभूति की - से साभार )

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