आपको ये पढ़ कर बेहद आश्चर्य होगा कि इस तरह हिन्दी, भारत की राष्ट्रीय भाषा बनते बनते रह गई... आपका एक शेयर जागरूकता के लिए कीमती है !

14 सितम्बर 2016   |  प्रियंका शर्मा   (420 बार पढ़ा जा चुका है)



1946 से लेकर 1949 तक जब भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया जा रहा था, उस दौरान भारत और भारत से जुड़े तमाम मुद्दों को लेकर संविधान सभा में लंबी लंबी बहस और चर्चा होती थी. इसका मकसद था कि जब संविधान को अमली जामा पहनाया जाए तो किसी भी वर्ग को यह न लगे कि उससे संबंधित मुद्दे की अनदेखी हुई है. वैसे तो लगभग सभी विषय बहस-मुबाहिस से होकर गुजरते थे लेकिन सबसे विवादित विषय रहा भाषा – संविधान को किस भाषा में लिखा जाए, सदन में कौन सी भाषा को अपनाया जाए, किस भाषा को ‘राष्ट्रीय भाषा’ का दर्जा दिया जाए, इसे लेकर किसी एक राय पर पहुंचना लगभग नामुमकिन सा रहा.


पहले पहल महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू समेत कई सदस्य हिन्दुस्तानी (हिन्दी और उर्दू का मिश्रण) भाषा के पक्ष में दिखे. 1937 में ही नेहरू ने अपनी राय रखते हुए कहा था कि भारत भर में आधिकारिक रूप से संपर्क स्थापित करने के लिए एक भाषा का होना जरूरी है और हिन्दुस्तानी से अच्छा क्या हो सकता है. वहीं गांधी ने भी कहा था कि अंग्रेजी से बेहतर होगा कि हिन्दुस्तानी को भारत की राष्टीय भाषा बनाया जाए क्योंकि यह हिंदु और मुसलमान, उत्तर और दक्षिण को जोड़ती है. लेकिन विभाजन ने कई सदस्यों के मन में इतनी चिढ़ और गुस्सा भर दिया कि हिन्दुस्तानी की मांग पीछे होती चली गई और शुद्ध हिन्दी (संस्कृतनिष्ठ) के पक्षधर भारी पड़ते नज़र आए. इधर दक्षिण भारतीय सदस्य तो हिन्दुस्तानी और हिन्दी दोनों के ही खिलाफ नज़र आए. जब कभी कोई सदस्य अपनी बात हिन्दी या हिन्दुस्तानी में बोलता था तो कोई दक्षिण भारतीय सदस्य इसके अनुवाद की मांग करने लगता था.



इतिहासविद् रामचंद्र गुहा की किताब ‘इंडिया ऑफ्टर गांधी’ में इस विवादित विषय पर रोशनी डाली गई है. एक सदस्य आरवी धुलेकर का जिक्र करते हुए लिखा गया है – जब धुलेकर ने हिन्दुस्तानी में अपनी बात कहनी शुरू की तो अध्यक्ष ने उन्हें टोकते हुए कहा कि सभा में मौजूद कई लोगों को हिन्दी नहीं आती है और इसलिए वह उनकी बात समझ नहीं पा रहे हैं. इस पर धुलेकर ने तिलमिलाते हुए कहा कि 'जिन्हें हिन्दुस्तानी नहीं आती, उन्हें इस देश में रहने का हक नहीं है.'



उधर मद्रास के प्रतिनिधित्व टीटी कृष्णामचारी ने बड़ी ही साफगोई से कहा ‘मुझे अंग्रेजी पसंद नहीं क्योंकि इसकी वजह से मुझे जबरदस्ती शेक्सपीयर और मिल्टन को सीखना पड़ा जिनमें मुझे तनिक भी रुचि नहीं थी. अब अगर हमें हिन्दी सीखने के लिए मजबूर किया जाएगा तो इस उम्र में यह करना मेरे लिए मुश्किल होगा. साथ ही इस तरह की असहिष्णुता हमारे अंदर इस बात का डर भी पैदा कर देगी कि एक मजबूत केंद्र सरकार का मतलब उन लोगों को गुलाम बनाना भी है जो केंद्र की भाषा नहीं बोल सकते. सर...मैं दक्षिण भारतीयों की ओर से यह चेतावनी देना चाहूंगा कि पहले से ही दक्षिण भारत में ऐसे तत्व हैं जो वहां बंटवारा चाहतें है, ऊपर से मेरे यूपी के दोस्त ‘हिन्दी साम्राज्यवाद’ फैलाकर हमारी समस्या को बढ़ाने का ही काम करेंगे. तो मेरे यूपी के दोस्त यह तय कर लें कि उन्हें ‘अखंड भारत’ चाहिए या ‘हिन्दी-भारत’...’


कड़ी बहस के बाद संविधान सभा इस समझौते पर पहुंची कि ‘भारत की राजभाषा हिन्दी (देवनागरी लिपि) होगी लेकिन संविधान लागू होने के 15 साल तक यानि 1965 तक सभी सरकार कामकाज (अदालत और तमाम अन्य सेवाएं) अंग्रेजी में ही किया जाएगा.' हालांकि संविधान सभा में लिया गया यह फैसला 15 साल बाद कुछ और ही रंग लाया.

1963 में नेहरू ने राजभाषा अधिनियम को दिशा देने का काम किया जिसके तहत उन्होंने इस बात की तरफ इशारा किया कि 1965 से आधिकारिक रूप से सभी तरह का संचार हिन्दी में किया जाएगा और अंग्रेजी को एक सहायक भाषा के रूप में इस्तेमाल किया जा ‘सकता’ है. नेहरू के इस संकेत ने हिन्दी विरोधियों के कान खड़े कर दिए. उन्हें इस 'सकता' है में इस शंका का संकेत मिला कि हो सकता है कि केंद्र के द्वारा गैर हिन्दी भाषियों पर हिन्दी 'थोपी' जाए, अंग्रेजी का सफाया हो जाए और यही नहीं हिन्दी को राजभाषा के साथ साथ राष्ट्रभाषा का दर्जा भी दे दिया जाए.

26 जनवरी 1965 को तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने हिन्दी को राजभाषा घोषित करने का फैसला कर लिया था लेकिन उससे पहले ही दक्षिण भारतीय राजनीति क पार्टी डीएमके ने इस फैसले के खिलाफ तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर दी. मदुरै से लेकर कोयमबटूर और मद्रास से लेकर छोटे छोटे गांव में हिन्दी की किताबों को जलाया गया, यहां तक कि कुछ मामले ऐसे भी आए जिसमें तमिल भाषा के लिए लोगों ने जान तक दे दी.

इतने विरोध के बाद जाहिर है कांग्रेस अपने फैसले पर नरम पड़ती नज़र आई और शास्त्री ने ऑल इंडिया रेडियो पर राष्ट्र के नाम संदेश में साफ किया कि अंग्रेजी का इस्तेमाल तब तक किया जा सकता है जब तक जनता चाहे. साथ ही उन्होंने गैर हिन्दी भाषियों के डर को दूर करते हुए आश्वासन दिया कि हर राज्य यह खुद तय कर सकता है कि वह किस भाषा में सरकारी कामकाज या संचार करना चाहता है, वह क्षेत्रीय भाषा भी हो सकती है या अंग्रेजी भी. साथ ही केंद्रीय स्तर पर हिन्दी के साथ साथ अंग्रेजी भी प्रमुख तौर पर कामकाज और संचार की भाषा होगी.


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री


इतने कड़े विरोध के बाद हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा तो मिल गया लेकिन 'राष्ट्रीय भाषा' का दर्जा मिलते मिलते रह गया. यह बात अलग है कि कई स्कूली किताबों में हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा बता दिया जाता है जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि भारत की कोई राष्ट्रीय भाषा है ही नहीं. भारतीय संविधान में किसी को भी राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं है. राजभाषा विभाग द्वारा यह साफ किया गया है कि हिन्दी के साथ ही साथ अंग्रेजी को भी संसद और केंद्र में कामकाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा राज्यों को विधायिका के तहत अपनी भाषा खुद तय करने का अधिकार है जिसके फलस्वरूप भारत में 22 भाषाओंको आधिकारिक दर्जा मिला हुआ है जिसमें अंग्रेजी और हिन्दी भी शामिल है. अलग अलग मौकों पर अदालत द्वारा यह साफ किया गया है कि इन सभी भाषाओं को बराबरी का दर्जा हासिल है और कोई भी भाषा किसी से भी कम या ज्यादा नहीं है.


गुहा की लिखी किताब में एक और दिलचस्प किस्सा है. रेडियो पर लाल बहादुर शास्त्री की इस अहम घोषणा के बाद एक बार फिर जब यह मामला संसद में उठा तो एंग्लो भारतीय सदस्य फ्रैंक एंथनी ने अंग्रेजी को स्वीकार नहीं करने की हिन्दी भाषियों की 'असहिष्णुता' पर चिंता जताई. इसके जवाब में जे बी कृपलानी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फ्रैंक को भारत में अपनी भाषा (अंग्रेजी) के खत्म होने की चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि ‘अब तो हमारे बच्चे भी अम्मा-अप्पा नहीं मम्मी पापा बोलने लगे हैं. यहां तक की हम अपने कुत्तों से भी अंग्रेजी में ही बात करते हैं.’ अपने पैर जमा चुकी अंग्रेजी पर कृपलानी ने तंज कसते हुए एंथनी को ‘विश्वास’ दिलाया कि इंग्लैंड से अंग्रेजी गायब हो सकती है लेकिन भारत से कभी नहीं...

अगला लेख: क्या



गुरमुख सिंह
25 अक्तूबर 2016

प्रतीत होता है कि पुनः हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु प्रयास की भूमिका बन रही है

गुरमुख सिंह
25 अक्तूबर 2016

आपकी पोस्ट ने किशोरावस्था की एक सच्ची घटना की याद ताजा कर दी यह घटना सन ६2 की है हम लोग शहर एवम दुकानों पर अंगेजी में लिखे बोर्ड हटवा कर घूम घूम कर अंग्रेजी हटाओ एवम हिदी को राष्ट्रभाषा बनाओ अभियान चला रहे थे इत्तफाक से मेरी जेब में पेन था जिस पर अंग्रेजी में लिखा था एक दूकानदार ने इस पर आपत्ति की कि आपने भी तो अङ्ग्रेजी लिखा पेन रखा है तो मैंने अपना पेन तोड़ क्र फेंक दिया आज तक यह नहीं समझ सका कि यह मातृभाषा के प्रति स्नेह था अथवा कलम तोड़ कर सरस्वती माँ का निरादर आशा ह कि आप मार्ग दरशन करेगे

गुरमुख सिंह
25 अक्तूबर 2016

आपकी पोस्ट ने किशोरावस्था की एक सच्ची घटना की याद ताजा कर दी यह घटना सन ६2 की है हम लोग शहर एवम दुकानों पर अंगेजी में लिखे बोर्ड हटवा कर घूम घूम कर अंग्रेजी हटाओ एवम हिदी को राष्ट्रभाषा बनाओ अभियान चला रहे थे इत्तफाक से मेरी जेब में पेन था जिस पर अंग्रेजी में लिखा था एक दूकानदार ने इस पर आपत्ति की कि आपने भी तो अङ्ग्रेजी लिखा पेन रखा है तो मैंने अपना पेन तोड़ क्र फेंक दिया आज तक यह नहीं समझ सका कि यह मातृभाषा के प्रति स्नेह था अथवा कलम तोड़ कर सरस्वती माँ का निरादर आशा ह कि आप मार्ग दरशन करेगे

प्रियंका जी,

लेख तो जानकारी पूर्ण है. यदि हो सके तो यह भी बताईए कि हिंदी राजभाषा चुनी कैसे गई. .. इस भाग को आपने गायब ही कर दिया है. धुलेकर के वक्तव्य से मैं आज भी सहमत नहीं हूँ. टीटीके की बात सच साबित हो सकती थी यदि ,सही सँभाला नहीं गया होता. इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए आप हिंदी कुंज. कॉम पर मेरी राष्ट्रभाषा संबंधी शृंखला देख सकती हैं,.

अर्चना गंगवार
27 सितम्बर 2016

बहुत ही अच्छी जानकारी है । एक देश की एक ही आधिकारिक और संसद की भाषा होनी चाहिए ।हमारे देश की जो गरीब जनसँख्या जो संख्या में भी बहुत ज्यादा है जो रोज़ी रोटी के लिए अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य जाती है उसको भाषा के कारन कितनी समाया से गुजरना पड़ता होगा इस और कभी किसी का विचार नहीं गया होगा ।
भाषा के कारन भी हम विभाजित हो जाते है
लेकिन दुनिया में अपनी सशक्त पहचान बनाने के लिए एक राष्ट्रीय भाषा आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है

शोभा भारद्वाज
27 सितम्बर 2016

जानकारी से पूर्ण लेख

प्रियंका शर्मा
29 सितम्बर 2016

आभार आदरणीय शोभा जी

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 सितम्बर 2016
आज का सुवचन
05 सितम्बर 2016
17 सितम्बर 2016
आज हर हिंदुस्तानी के मन में बसे श्री नरेंद्र मोदी जी को शुभकामनाओं की सप्रेम भेंट
17 सितम्बर 2016
03 सितम्बर 2016
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेटवर्क 18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यूपी चुनाव, दलितों पर अत्याचार का मुद्दा, अर्थव्यवस्था के सवाल, कश्मीर का बवाल से लेकर हर मसले पर बड़ी ही बेबाकी से अपनी राय रखी.नेटवर्क 18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी के साथ खास बातचीत में पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी के कुछ अनछुए पह
03 सितम्बर 2016
22 सितम्बर 2016
भारत एक इसी जगह है जहा पर फिल्म स्टार्स को लोग पूजते है लेकिन वही ऐसी भी एक एक्ट्रेस है जिन्होंने पहले किसी को राखी बाँधी लेकिन बाद में उसी से शादी भी कर ली. ये कोई मामूली एक्ट्रेस नहीं है इन्होने कई बड़ी बड़ी फिल्मो में काम कर चुकी है.वो मशहूर एक्ट्रेस और कोई नहीं बल्कि बॉलीवुड अदाकारा श्रीदेवी है. ब
22 सितम्बर 2016
03 सितम्बर 2016
2016 फरवरी में लॉस एंजिल्स में बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने अपने प्रेमी जीन गुडइनफ के साथ शादी कर थी. इनकी शादी की खबर तब आई, जब शादी के सारे रीति रिवाज पूरे हो चुके थे.इतना ही नहीं प्रीति ने शादी की तस्वीरें भी किसी के साथ शेयर नहीं की थीं, लेकिन इनकी शादी के 6 महीनों बाद अब शादी की तस्वीरें सो
03 सितम्बर 2016
20 सितम्बर 2016
शायद आप इनके बारे में ये सब नहीं जानते होंगे जो अब आप इसमें पढ़ेंगे ! भारत तो है ही चमत्कारों और संतो का देश और संसार में भारत जैसा कोई दूसरा देश है भला . लेकिन पहले तो नाम जान लीजिये: सन्त ज्ञानेश्वर ।सन्त नामदेव ।सन्त एकनाथ ।सन्त तुकाराम ।सन्त रैदास । 1. सन्त ज्ञानेश्व
20 सितम्बर 2016
10 सितम्बर 2016
Hi Friends, Ham Sabhi Pratyek 14 September Ko Hindi Diwas Ke Rup Me Manate Hain. Main Hindi Se Related Rochak Tathya Pahle Hi Publish Kar Chuka Hun, Jise Aap Yaha Padh Sakte Hain >> Hindi Language Wiki in HindiRelated Hindi Diwas ( 14 September ) Ki Jankari ~ WikiHi
10 सितम्बर 2016
20 सितम्बर 2016
शायद आप इनके बारे में ये सब नहीं जानते होंगे जो अब आप इसमें पढ़ेंगे ! भारत तो है ही चमत्कारों और संतो का देश और संसार में भारत जैसा कोई दूसरा देश है भला . लेकिन पहले तो नाम जान लीजिये: सन्त ज्ञानेश्वर ।सन्त नामदेव ।सन्त एकनाथ ।सन्त तुकाराम ।सन्त रैदास । 1. सन्त ज्ञानेश्व
20 सितम्बर 2016
03 सितम्बर 2016
रिलायंस जियो 4G की धमाकेदार लॉन्चिंग के बाद 4G स्मार्टफोन को लेकर जबर्दस्त क्रेज बढ़ा है. ऐसे में इन दिनों यदि आप 4G स्मार्टफोन खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपके लिए बेहतरीन मौका है. एक नजर 10 हजार रुपए से भी कम कीमत वाले 4G स्मार्टफोन पर, जिनमें कई खूबियां हैं.Moto G (Gen 3)इस कटेगरी में मोटोरोला मो
03 सितम्बर 2016
08 सितम्बर 2016
​नगर की घनी आबादी वाले क्षेत्र घंटाघर चौराहे पर नगर मजिस्ट्रेट कीअनुमति से स्थापित की गई गणेश प्रतिमा को हटाने के लिये एक दरोगा ने अपनी दबंगईदिखाई। उसने गणेश प्रतिमा हटाने की धमकी दे दी। इसके बाद गुस्साये व्यापारियों नेबाजार बंद कर विरोध शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख नगर मजिस्ट्रेट मौके परपहुंचे।
08 सितम्बर 2016
08 सितम्बर 2016
सावधान हो जाइये बगैर आपकी जानकारी के और आपके डिटेल्स कहीं से भी प्राप्त करके कोई भी आपके नाम से बैंक में अकाउंट खोल सकता है। मनचाहा पता और मनचाही जगह पर और फिर उसके आधार पर क्रेडिट कार्ड भी ले सकता है और लाखों की खरीदारी भी क
08 सितम्बर 2016
13 सितम्बर 2016
एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान हनुमान डॉक्‍टर के रूप में पूजे जाते हैं. मान्यता है कि इस मंदिर के हनुमान स्वयं अपने एक भक्त का इलाज करने डॉक्टर बनकर पहुंचे थे. इस मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. श्रद्धालुओं का मानना है कि, डॉ. हनुमान के पास सभी प्रकार के रोगों का
13 सितम्बर 2016
03 सितम्बर 2016
Hi Friends, Padhiye Aaj Shikshak Par Quotes Hindi Me ( Teacher Quotes In Hindi ). Ham Sabhi Jaante Hain Ki India Me Pratyek 5 September Ko Dr. Sarvapalli RadhaKrishnan Ke Janm Diwas Ko Shikshak Diwas Ke Rup Me Manaya Jata Hai.Is Liye Aaj Padhiye Teacher Quotes In HindiTea
03 सितम्बर 2016
26 सितम्बर 2016
सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हुआ था. इस मैसेज के जरिए दावा है कि यूपी के मथुरा में दुनिया का सबसे ऊंचा श्री कृष्णमंदिर बन रहा है. एबीपी न्यूज़ ने पड़ताल की वायरल हो रहे इस मैसेज की.वायरल हो रही तस्वीर में यह भी दावा किया जा रहा है कि दुनिया के इस सबसे ऊंचे मंदिर की ऊंचाई मुकेश अंबानी के मुंबई में ब
26 सितम्बर 2016
04 सितम्बर 2016
तेरी तरहा मैं हो नहीं सकता नहीं ये करिश्मा हो नहीं सकतामैंने पहचान मिटा दी अपनी भीड़ मे अब खो नहीं सकताबहुत से काम याद रहते है दिन मे मैं सो नहीं सकताकि पढ़ लूँ पलकों पे लिखी इतना सच्चा हो नहीं सकतासमीर कुमार शुक्ल
04 सितम्बर 2016
04 सितम्बर 2016
अगस्त महीने की आखिरी किताब थी जीनेट वॉल्स की लिखी 'द ग्लास कैसल'। जीनेट वॉल्स एक अमरीकी जर्नलिस्ट हैं और ये उनका लिखा संस्मरण है। एक किताब जो उनके और उनके पिता के रिश्ते के बीच कुछ तलाश करती हुई सीधे दिल में उतरती है और कुछ हद तक उसे तोड़ भी देती है।इंसान एक परिस्थितिजन्य पुतला है। उसका व्यक्तित्व पर
04 सितम्बर 2016
04 सितम्बर 2016
धूप मे धूप साये मे साया हूँ बस यही नुस्का आजमाया हूँएक बोझ दिल से उतर गया कई दिनों बाद मुस्कुराया हूँदीवारें भी लिपट पड़ी मुझसेमुद्दतों के बाद घर आया हूँउसे पता नहीं मेरे आने का छुप कर के उसे बुलाया हूँ समीर कुमार शुक्ल
04 सितम्बर 2016
06 सितम्बर 2016
आज का सुवचन
06 सितम्बर 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x