स्केच - तीन मित्र तीन बात के एक मित्र का विवरण

15 सितम्बर 2016   |  आलोक सिन्हा   (146 बार पढ़ा जा चुका है)

स्केच - तीन मित्र तीन बात के एक मित्र का विवरण (१)

मेरे एक मित्र हैं - डाक्टर पारिजात जो यहीं राजकीय चिकित्सालय में सर्जन हैं | उनकी पत्नी डा.पल्लवी इंगलिश में एम . ए. व् पी एच् डी हैं | लेकिन मेरे ये मित्र भी अपने दाम्पत्य जीवन से संतुष्ट नहीं हैं | उनकी शिकायत है कि उनकी पत्नी किसी भी बात में उनका सहयोग नहीं करतीं | न जरा सा उनका कहना मानतीं हैं , न उनकी किसी आवश्यकता का ध्यान रखतीं हैं| यहाँ तक कि वे जब सारे दिन कम कर के घर लौटते हैं तो अधिक तर घर पर नहीं मिलतीं | या तो सो रही होंगी या पडौस में किसी सहेली के घर गप शप कर रहीं होंगी | अगर किसी कारणवश वो कुछ समय के लिए अचानक दोपहर में घर आ जाएँ तो हमेशा टी वी पर कोई सीरियल ही देखती मिलेंगी और उनसे कितना भी कहो जल्दी अस्पताल वापस जाना है जरा दो मिनट को उठ कर लंच मेज पर लगा दो , पर वो तब तक अपनी जगह से नहीं उठेंगी जब तक उनका सीरियल समाप्त न हो जाये |इस के लिए अगर उनको टोको या शिकायत के रूप में उनसे कुछ कहो तो उसका मतलब है एक लम्बी चौड़ी बहस को निमन्त्रण देना |कहेंगी कि सब सामन मेज पर ही तो रखा है | जरा हाथ हिला कर क्या डोंगे से बाउल में सब्जी नहीं दाल सकते | वैसे तो दुनियां में ढोल पीटते फिरते हो कि मैं अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता हूँ |क्या ये ही युम्हारा प्यार है |जो मैं एक मिनट शान्ति से बैठ कर अपना मन चाहा सीरियल तक नहीं देख सकती |

आये दिन दोनों की दिलचस्प शिकायतें अक्सर मेरे सामनें आतीं रहतीं हैं | पर मैं अभी तक उनकी न तो जड़ समझ पाया हूँ , न उनका कोई समाधान ही खोज पाया हूँ |

कल ही की बात है , मेरे ये मित्र मुँह लटकाए मेरे पासआये और बोले : भाई ! बताओ अब मैं क्या करूं ? श्रीमती जी का कहना है कि उन्हें कुत्ते पालने का शौक है और वो उसे जरूर पालेंगी |जब कि कुत्ता मुझे बहुत नापसंद है | मैं एक पल को भी गंदे जानवर को सहन नहीं कर सकता | किन्तु फिर भी उन्होंने कुत्ता मगाने का आर्डर यह कह कर दे दिया कि मेरा भी तो कुछ मन है , मेरे भी तो कुछ अधिकार हैं | जब में तुम्हारे कहीं आने जानें पर कुछ नहीं कहती ,रोज रोज तुम्हारे मित्रों के घर पर आने के लिए तुम्हें नहीं टोकती तो क्या अपने लिए मैं एक कुत्ता नहीं पाल सकती |और फिर नाराज होकर दुसरे कमरे में चली गयी | अब बताओ मैं क्या करूं ? मैं तो उस घर में एक पल नहीं रह सकता जहाँ कुत्ता रहेगा |

बात जब बहुत अधिक बढ़ गई और दोनों ने एक दुसरे से बोलना तक बंद कर दिया तो बड़ा होने के कारण मुझे मध्यस्तता के लिए बीच में उतरना पड़ा |

मैं पारिजात से तो प्रायः मिलता ही रहता था | पर पल्लवी से कभी भी मेरी खुल कर बातें नहीं हुई थी |इसलिए उसके विचार जानना मेरे लिए बहुत आवश्यक था |

अगले दिन जब मैं पल्लवी के घर पहुंचा तो वह सोफे पर बैठी शरद चन्द चट्टोपाध्याय का उपन्यास स्व्मसिद्धा पढ़ रही थी |उसने जैसे ही मुझे देखा , तुरन्त पुस्तक बंद करदी और प्रणाम कर के मेरे लिए पानी लेने रसोई में चली गई | जब वापस आई तो उसके चहरे पर चिंता की गहरी रेखाएं स्पष्ट दिखाई दे रहीं थीं | मैंने उसके हाथ से पानी का गिलास लेने के बाद उसे बैठने का संकेत करते हुए पूछा : ऐसा क्या हुआ है तुम दोनों के बीच कि आपस में बात तक नहीं कर रहे हो |

मेरा प्रश्न सुन कर उसकी आँखों में कुछ आंसू छलक आये वह उन्हें जल्दी जल्दी पलकें झपक कर अपनी आँखों की कोरों में समेटते हुए बोली भाई साहब ! आप अकेले पारिजात का पक्ष सुन कर यही सोच रहे होंगे कि घर में जो कुछ हो रहा है , बस मैं उस सब के लिए जिम्मेदार हूँ | पर आप ही बताइये क्या कोई लड़की झगड़ा करने के लिए शादी करती है | क्या मुझे यह अच्छा लग रहा है कि पारिजात मेरे साथ बैठ कर खाना तक नहीं खा रहे हैं | हम दोनों के बीच कई दिन से कोई सम्वाद तक नहीं है |

गला भर आने के कारण जब पल्लवी कुछ देर के लिए चुप हो गई तो मैंने धीरे से कहा पर तुम दोनों के बीच ऐसी क्या समस्या है जो सम्बन्धों में इतनी कटुता आ गई | दोनों पढ़े लिखे हो , समझदार हो |

फिर पल्लवी अपने आंचल से आंसू पोंछते हुए बोली _ दरअसल पारिजात मुझसे तो अपनी हर बात मनवाना चाहते हैं , पर मेरी एक छोटी सी इच्छा तक पूरी करने को तैयार नहीं होते | मैं अपने घर में रात दिन बस जीन्स ही पहना करती थी , पर इन्हें यह बिलकुल पसंद नहीं है | हमारे घर सप्ताह में दो दिन नान वैज अवश्य खाया जाता था , पर यहाँ कभी होटल पर खाने की बात तो छोड़िए , पारिजात घर लाकर भी नहीं खाने देते | भाई साहब आपको क्या बताऊँ यहाँ गोल गप्पे ( पानी पुरी ) जैसी छोटी चीज की भी खाने की अनुमति नहीं है | क्योंकि खोमचे वाला हमें एक एक गोल गप्पा अपने गंदे नाखूनों वाले हाथ को कांजी के पानी में घंगोल घगोल कर देता है |कहते हैं --- घी मत खाओ | रिफाइंड खाओ |यह हार्ट अटैक से बचाता है | अरबी गरिष्ट है | जिमिकंद कब्ज करता है | बस रोज एक ही तरह का उबला हुआ खाना खाये जाओ और चुप चाप आँख बंद कर के ससुराल के गुण गाये जाओ |

कुछ रुकने के बाद वह फिर बोली --- भैया ! एक क्लब भी हमारे बीच झगड़े का बहुत बड़ा कारण है | सच मेरी क्लब विलब में कोई रूचि नहीं है | पर ये अपना स्टेट्स बढ़ाने के लिए मुझे रोज अपने साथ क्लब ले जाना चाहते हैं | कहते हैं जब तुम धारा प्रवाह इंगलिश में सबसे बात करती हो ना तो कुछ अधिकारियों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है | पर आप ही बताइये वहाँ न तो मेरी उम्र की कोई महिला सदस्य हैं , न मुझे ताश या कोई खेल खेलना आता है , तो मैं वहाँ रोज जाकर क्या करूं ? फिर वहाँ मन हो या न हो लोगों से बात करो , फिर उनसे घर आने का आग्रह करो और जब वो सपरिवार आयें तो उनके लिए अच्छी सी चाय की व्यवस्था कर

मैंने कहा ये कुत्ते वाली क्या समस्या है |

पल्लवी इस प्रश्न पर कुछ हंसते हुए बोली - यह प्रसंग तो भाई साहब मैंने वैसे ही छेड़ दिया था | मैं सच कह रही हूँ , इसके लिए मेरी कोई जिद नहीं है | जिस दिन मैंने कुत्ता पालने की बात कही थी , उस दिन मुझे इन पर बहुत गुस्सा आ रहा था | मैंने शादी के बाद पहली बार इनसे अपनी एक मात्र सहेली के विवाह की वर्ष गाँठ में जब इनसे चलने के लिए कहा तो इन्होने साफ मना कर दिया | बोले -- आज तो भई बिलकुल हिम्मत नहीं हो रही कहीं जाने की | मैंने इनसे यहाँ तक कहा कि मैंने उससे वादा किया है , मैं झूठी पड जाऊंगी | मैं आपकी थकन समझ रही हूँ | आप बस गाडी में बैठे रहिये | दस किलो मीटर ही तो जाना है | गाडी मैं ड्राइव कर लूंगी | पर ये फिर भी जाने को तैयार नहीं हुए |

जब कि आप पारिजात से पूछ कर देखिये कि मैंने कभी भी चाहे मेरा कितना भी मन न हो इनके किसी भी मित्र के किसी आयोजन में जाने के लिए जरा सा मना किया हो |

पल्लवी की बाँतें सुनकर मुझे लगा कि उसकी कुछ शिकायतें तो

वास्तव में बहुत विचार करने योग्य हैं और उनका समाधान भी शीघ्र अति शीघ्र होना चाहिए |पर साथ ही उसे भी अपने आपसी सम्बन्धों में फिर से नई मिठास घोलने के लिए अपने ओय्व्हार में कुछ और अधिक अपनापन प्रदर्शित करने की आवश्यकता है | जिसके लिए मुझे दोनों को बड़े प्यार से समझाना होगा | वह भी गोलमोल शब्दों में , बिना यह प्रदर्शित किये कि मुझे दोनों की घरेलू शिकायतों का पता है| मेरी दोनों से इस विषय पर अलग अलग विचार विमर्श हुआ है |

पर मैं अपने मिशन के प्रथम चरण में ही विफल हो गया | क्योंकि दोनों ने ही मेरे सुझाव ऊपर से तो अक्षरशः मान लिए पर वो शायद अति शिक्षित व् बुजुर्गों की अनुपस्थिति में स्वतंत्र जीवन यापन करने के कारण भीतर से उन्हें स्वीकार नहीं कर पाए |

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