बलवीर सिंह रंग

16 सितम्बर 2016   |  आलोक सिन्हा   (337 बार पढ़ा जा चुका है)

न छेड़ो मुझे मैं सताया गया हूँ ,

हंसाते हंसाते रुलाया गया हूँ |

करो व्यंग कितने तुम मेरे मिलन पर ,

मैं आया नहीं हूँ , बुलाया गया हूँ |

ओ जीवन के थके पखेरू बढ़े चलो हिम्मत मत हारो ,

पंखों में भविष्य बंदी है ,मत अतीत की ओर निहारो |

क्या चिता धरती यदि छूटे , उड़ने को आकाश बहुत है |

बलवीर सिंह रंग

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