तुम्हारी शपथ मैं तुम्हारा नहीं हूँ --- , गीत

24 सितम्बर 2016   |  आलोक सिन्हा   (424 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम्हारी शपथ मैं तुम्हारा नहीं हूँ ,

भटकती लहर हूँ किनारा नहीं हूँ ||

तुम्हारा ही क्या , मैं नहीं हूँ किसी का ,

मुझे अंत तक दुःख रहेगा इसी का |

किया एक अपराध मैंने जगत में ,

नहीं जिसका कोई हुआ मैं उसी का |

आगे की तो कुछ जानता नहीं हूँ ,

अभी तक तो जीवन से हारा नहीं हूँ ||

तुम्हारी शपथ मैं तुम्हारा नहीं हूँ |

जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम विश्वास बहुत है ||

ओ जीवन के थके पखेरू बढ़े चलो हिम्मत मत हारो ,

पंखों में भविष्य बंदी है ,मत अतीत की ओर निहारो |

क्या चिता धरती यदि छूटे , उड़ने को आकाश बहुत है |

जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम विश्वास बहुत है ||

बलवीर सिंह रंग

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