गांधी बाबा के स्वराज में ,

30 सितम्बर 2016   |  आलोक सिन्हा   (172 बार पढ़ा जा चुका है)

गांधी बाबा के स्वराज में ,

सुरा बहुत है राज नहीं है |

राज बहुत खुलते हैं लेकिन ,

खिलता यहाँ समाज नहीं हैं |

यह देखो कैसी विडम्बना ,

राजनीति में नीति नहीं है |

और राजनैतिक लोगों को ,

नैतिकता से प्रीति नहीं है |

गोपाल प्रसाद व्यास

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