हास्य का तड़का

06 अक्तूबर 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (124 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@शक्ल तो है बन्दर जैसी@@@@

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पत्नी बोली एक दिन , हो आप बड़े बेवकूफ |

मैंने कहा तुरन्त उससे ,क्या है इसका प्रूफ ||

पत्नी बोली की आपने ,मुझसे आदर्श शादी |
कौड़ी मोल बेच डाली,आपने अपनी आजादी ||
आठ नहीं देते हो लेकिन , दे देते हो साठ |
ओरों की गलतियों से ,नहीं सीखते पाठ ||
पानी होता पास में ,फिर भी प्यासे रहते हो |
सिध्दान्तों के पीछे तुम ,दुःख रोजाना सहते हो ||
सच बोल कर लोगों को , नाराज तुम कर देते हो |
मुस्कान मिटा कर होठों की,चैन चुरा तुम लेते हो ||
मूर्खों के हो सरताज ,पर चतुर बने फिरते हो |
शक्ल तो है बन्दर जैसी,पर सुन्दरियों पर मरते हो ||

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