कटाक्ष युवाओ की जीवन शैली पर

08 अक्तूबर 2016   |  दिलीप राठौर   (137 बार पढ़ा जा चुका है)

आजकल के युवा जो कि अपने आप को विलासिता की जिन्दगी से ओतप्रोत कर रहे है, फ़िल्मी और काल्पनिक दुनिया में खोते जा रहे है, उनके अंतर्मन को झकझोरने का एक प्रयास है ताकि वो लोग अपने जीवन के उद्देश्य को जानकार सही दिशा में बढ़ कर सफलता को प्राप्त करे | वयंग्ये युवाओ की जीवन शेली पर आधारित है,

“आखिर क्यों अमीरों को और अमीर करते है हम

` खाली है जेब अपनी फिर भी, उनकी जेबे भरते है हम

देख कर नंगे नाच को, क्यों संस्कृति को खोते है हम

जूठी है सारी कल्पनाये वो, फिर भी देखने जाते है हम

चंद पलो की आतिशी में, जीवन के पल क्यों खोते है हम

मनोरंजन के नाम पर, समय को क्यों लुटाते है हम

देश हमारा बेच के वो, काला करते मन और धन

भूखे बच्चे बिलख रहे है, खाने को है दाना कम

लटक लटक के लेते फांसी, जीने का हौसला है कम

चैन से वो तो खाते पीते, भूखे ही मर जाते है हम

आखिर क्यों अमीरों को और अमीर करते है हम”

#दिलीप राठौर

अगला लेख: गद्दार नेताओ को जवाब



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
04 अक्तूबर 2016
01 अक्तूबर 2016
08 अक्तूबर 2016
05 अक्तूबर 2016
11 अक्तूबर 2016
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x