माता जी ----- प्रेम अपनी प्रकृति में

11 अक्तूबर 2016   |  आलोक सिन्हा   (92 बार पढ़ा जा चुका है)

प्रेम अपनी प्रकृति में अपने आप को दूसरों को देने की अभिलाषा है | या यह कहें कि दूसरों को आत्मसात करने की प्रवृति है | यह सत्ता के साथ सत्ता का क्रिया व्यवहार है |

प्रेम ऐसी प्यास है जिसे कोई मानवी सम्बन्ध कभी नहीं बुझा सकता |

माता जी ( श्री अरविन्द आश्रम )

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