क्यों होगी देशप्रेमी देशभक्त खूंखार बहादुर कौम की गुलामी? क्या फिर देनी पड़ेगी भारत के शत्रुओं को सलामी?

15 अक्तूबर 2016   |  रजत ऐलावादी   (162 बार पढ़ा जा चुका है)

क्यों होगी देशप्रेमी देशभक्त खूंखार बहादुर कौम की गुलामी?   क्या फिर देनी पड़ेगी भारत के शत्रुओं को सलामी?

क्या फिर होगी भारत में गुलामी ?

क्या फिर देनी पड़ेगी देश के दुश्मनों को सलामी?

क्यों ज़रूरी है देशद्रोहियों-शत्रुओं पर वार लगातार?

सारा भारत एक,

फिर भी घूम रहे अंग्रेज़ अनेक,

भारत का कारोबार बेच,

भारत को कुचलते मसलते लूटते फिरंगी शत्रु अनेकोनेक।

लड़े थे और हुए शहीद -

भगत-सुखदेव-बोस से कंपनी राज हुआ भयभीत।

सम्मानित करते थे दूसरों के रिवाज़-रीत,

भारत को कठोर अनुशासन से,

प्रगाढ़ बना गेट थे भारतभक्ति के गीत।

कितने लीन्हे सनकी सिंह उजाड़,

सॉन्डर्स-डायर खाए पछाड़,

आयी नवयुवकों की बाढ़,

जिनमें सच्चा भारतीय रक्त प्रगाढ़।

नरम दल और गरम दल,

भारत भूमि के दोनों कर्म बल,

अहिंसा व हिंसा,

दोनों की ही हृदयपूर्वक प्रशंसा,

करते रहो देशद्रोहियों पर वार प्रबल,

फिरंगी न पाये आघात से संभल।


Poems by Rajat Ailawadi

अगला लेख: जय भारत जय!



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
15 अक्तूबर 2016
15 अक्तूबर 2016
15 अक्तूबर 2016
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x