ईमानदारी और सादगी सफलता की एक कहानी - अश्वनी लोहानी

26 अक्तूबर 2016   |  जीतेन्द्र कुमार शर्मा   (228 बार पढ़ा जा चुका है)

ईमानदारी ऐसी कि अशोका होटल में अपना ऑफिस होने पर भी कभी बीवी.बच्चों संग सरकारी पैसे से इस दिल्ली के फाइव स्टार होटल मे एक कप चाय भी नहीं पी। खुद को पहले नजीर बनाकर स्टाफ को भी शाहखर्ची से रोकने में सफल हुए अश्वनी लोहानी ने जब घाटे में चल रही इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन;प्ज्क्ब्द्ध को मुनाफे में पहुंचा दिया तो सब हैरान हो गए। इस बीच एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने लोहानी को अपने यहां बुलाकर खस्ताहाल मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को उबारने का जिम्मा सौंपा। यहां भी लोहानी ने ईमानदारी के दम पर कमाल कर दिखाया। घाटे में दम तोड़ते दो बड़े संस्थानों को इस रेलवे अफसर ने जब जिंदा कर दिखाया तो खबर मोदी तक पहुंची और उन्होंने अश्वनी को बड़ी जिम्मेदारी देने का मन बनाया। मोदी को लगा कि यूपीए राज में कंगाल हुए एयर इंडिया को संकट से उबारने के लिए ईमानदार अफसर की तलाश पूरी हुई। बस फिर क्या था कि उन्होंने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए इंडियन रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस के इस अफसर को एयर इंडिया का सीएमडी बना दिया और कहा कि.एयर इंडिया को घाटे से उबार दो तो मैं जानूं। महज एक साल के भीतर अश्वनी ने दो हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही इस सरकारी नागर विमान सेवा कंपनी को 105 करोड़ के मुनाफे में पहुंचाकर एक बार फिर सबको हैरान करते हुए मोदी का भरोसा जीत लिया। अगर कोई रेलवे का अफसर हवाई जहाज वाली कंपनी की कायापलट कर दे तो हर किसी का चौंकना लाजिमी है। मिलिए इस ईमानदार अफसर से।

परंपरा तोड़कर मोदी ने अश्वनी को सौंपी जिम्मेदारी

आमतौर पर एयर इंडिया का मुखिया यानी सीएमडी किसी सीनियर आईएएस को ही बनाया जाता है। भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा;प्त्म्ैद्ध के अफसर अश्वनी को हवाई सेवाओं का कोई अनुभव भी नहीं था। मगर जब मोदी तक खबर पहुंची कि देश में एक ऐसा इंजीनियर हैंए जिसने अपनी ईमानदारी व जुदा शैली से काम करते हुए घाटे में चल रहे मध्य प्रदेश टूरिज्म को भारी मुनाफे में पहुंचा दिया। इसके बाद यह अफसर आईटीडीसी यानी इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन का मुखिया रहा। अशोका जैसे फाइव स्टार होटल में ऑफिस होने के बाद भी कभी मुफ्त में न खुद या फिर यार.दोस्तों को कोई दावत कराने की बात छोड़िएए एक चाय भी नहीं पी। इस पर मोदी ने आईआरईएस अफसर होने के बाद भी अश्वनी के कंधे पर संकट में फंसे एयर इंडिया की जिम्मेदारी डाल दी।

कैसे अश्वनी ने एयर इंडिया को उबारा संकट से

अश्वनी ने जैसे ही अगस्त 2015 में एयर इंडिया के कुर्सी पर बैठे। सामने टेबल पर रिचर्ड बैंसन की लाइन फ्रेम कराकर रखी.यह लाइन है.क्लाइंड डोंट कम फर्स्टए इम्प्लाइज कम फर्स्ट।


यानी अश्वनी की नजर में किसी संस्थान की तरक्की में जब तक सभी स्टाफ का सौ प्रतिशत योगदान नहीं होगा तब तक वह संस्थान तरक्की नहीं कर सकता। यही वजह है कि ग्राहकों को भगवान मानने वाली धारणा से अलग हटकर अश्वनी ने स्टाफ से रोजाना संवाद कायम करना शुरू कर दिया। पायलट और एयर होस्टेस की वेतन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी दिक्कतें दूर की। फालतू के सभी खर्चे बंद कर दिए। मीटिंग और टूर के नाम पर अफसरों की शाहखर्ची पर लगाम लगाई। यहां तक कह दिया कि कोई स्टाफ उन्हें कभी बुके आदि नहीं भेंट करेगा। ऐसे तमाम फैसलों से अश्ननी ने सभी स्टाफ का सहयोग लेते हुए एयर इंडिया की हालत सुधार दी। सादगी का आलम यह है कि अश्वनी आज भी सरदार पटेल मार्ग स्थित रेलवे कालोनी के मकान में रहते हैं।


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