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पचास दिनों के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं

31 दिसम्बर 2016   |  जहाँगीर आलम
पचास दिनों के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं


आसनसोल ( जहाँगीर आलम) ) :- दुकाने सजी है और उनमे जरुरत के सामान भी उपलब्ध है, पर्यटकों की संख्या में भी कोई खासा कमी नहीं है. लेकिन इन सबो के बावजूद ग्राहक नहीं दिख रहे. ये हालात है, झारखण्ड-बंगाल की सीमा पर स्थित एक मात्र पर्यटक स्थल मैथन डैम की. जहाँ लोगो की भीड़ तो है लेकिन खरीदारी करने वाले अपेक्षाकृत कम ही है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के फैसले के बाद हुई मु्श्किल को 50 दिन की अवधि के भीतर दूर करने का ऐलान किया था. पचास दिन के बाद भी कई एटीएम बंद हैं, जबकि जिन एटीएम मशीनों में पैसा है उनके सामने लोगों की कतारें कम नहीं हुयी है. हालांकि, ये कतारें नोटबंदी के शुरुआती दिनों की तुलना में छोटी जरुर हुयी हैं. लोगों की शिकायत है कि कई बैंक प्रति व्यक्ति चार हजार रुपये से ज्यादा नहीं दे रहे हैं, जबकि आधिकारिक रूप से सप्ताह में यह सीमा 24 हजार रुपये है. इस पर बैंकों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त नकदी नहीं है. चूँकि नववर्ष का माहौल है ऐसे में पिकनिक स्थल की रौनक कुछ और ही होती है, लेकिन नोटबंदी का असर यहाँ भी देखने को मिला. मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी के फैसले पर जनता से मांगे पचास दिन का शुक्रवार को आखिरी दिन था और स्थिति का जायजा लेने की मकसद से श्वेत पत्र की टीम मैथन डैम पहुंची. जहाँ उम्मीद यही कि कम से कम इस स्थान पर नोटबंदी का असर नहीं दिखेगा और स्थिति का सही आकलन भी यही पर हो सकेगा. श्वेत पत्र के संवादाता ने जब वहां उपस्थित दुकानदारों, नौका वालो व पर्यटकों से इसका हाल जाना तो मालूम चला की स्थिति जस की तस ही है, बल्कि और ज्यादा बिगड़ने का अहसास भी हुआ. नौका विहार के साधन घोष ने बताया कि यहाँ पर्यटक तो पिछले वर्ष की तरह ही आ रहे है, लेकिन बहुत कम लोग ही नौका विहार कर रहे है. उन्होंने इसका कारन बताते हुए कहा कि एक तो लोगो के पास पैसे कम है, दूसरा वे आ भी रहे है तो 2000 रूपए का बड़ा नोट साथ ला रहे है अब यदि दिनभर में दो-चार पर्यटक भी ऐसे आ गए तो छुट्टे की समस्या उत्पन्न हो जाती है और ग्राहक को मजबूरन लौटाना पड़ता है, उन्होंने बताया कि जहाँ पिछले वर्ष रोजाना करीब पचास लोग नौका विहार का आन्नद उठाते थे वही इस वर्ष दस से बारह हो गए है. वही जब श्वेत पत्र के संवादाता ने उनसे नगदी रहित लेनदेन की बात पूछी तो नौका वालो ने कहा यहाँ वैसी कोई व्यवस्था नहीं है और यहाँ तक कि बैंक और एटीएम भी दस किलोमीटर दूर है. इसी दौरान आसनसोल निवासी विकास यादव भी नौका विहार करने को टिकट लेने आये लेकिन उनके पास भी दो हजार रूपए का नोट होने के कारन मायूस होकर वापस लौटना पड़ा. यही कथन वहां उपस्थित आईसक्रीम, बेलून विक्रेताओ से लेकर खिलौने व साज-सज्जा के दुकानदारों का था. पिकनिक मनाने आई धनबाद की मुनमुन ने कहा कि मोदी जी देश का सत्यानाश कर दिया है, लोग थोड़े-थोड़े पैसो को भी तरस रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पास भी जरुरत के हिसाब से ही पैसे है, जिससे वो सिर्फ यहाँ घूम सकती है यदि उन्हें नौका विहार करने की तमन्ना हुई तो उन्हें उधार लेना पड़ेगा. वही कई अन्य पर्यटकों ने भी मोदी सरकार को विफल बताते हुए कहा कि चंद लोगो को पकड़ने के लिए पुरे देश की जनता को परेशान किया गया. इसमें निम्न और माध्यम वर्ग के लोग ज्यादा आहात हुए है. आज भी उन्हें दो वक्त की भोजन व्यवस्था करने के लिए सोचना पड़ रहा है. सरकार की योजना का लाभ भविष्य में मिलेगा या नहीं यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन वर्तमान में लोग परेशान है और इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार है. यदि जनता ही नहीं रहेगी तो कैसा देश, कैसी सरकार और किसके लिए विकास होगा.

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