शाह सच बोल रहे हैं .....

07 जनवरी 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (229 बार पढ़ा जा चुका है)

 शाह सच बोल रहे हैं .....

''सच्चाई छिप नहीं सकती ,बनावट के उसूलों से ,

कि खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज़ के फूलों से .''

दुश्मन फिल्म का ये गाना एकाएक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इस दावे '' ढाई साल से थी नोटबंदी की तैयारी '' पढ़ते ही ज़ुबान पर आ गया .शाह का यह बयां मोदी के द्वारा नोटबंदी की आड़ में किये जा रहे घोटाले की तैयारी का सच सबके सामने ले आया और नोटबंदी की आड़ में अपने काले धन को जिस सफलता से मोदी-शाह की जोड़ी द्वारा ठिकाने लगाया गया उस सफलता के नशे को ऐसे ही सबके सामने ले आया जैसे कि एक शराबी शराब के नशे में अपना सारा सच उगल देता है .

शाह ने ऐसे समय में नोटबंदी की तैयारी का दावा किया है जब विपक्ष नोटबंदी के बाद नियमों में ६० से अधिक बार हुए बदलाव पर सरकार की आलोचना कर रहा है .हालाँकि विपक्ष का यह आरोप गलत है कि मोदी सरकार ने पूरे देश को सीधे प्रभावित करने वाले फैसले को लागू करने से पूर्व तैयारी नहीं की जबकि शाह सच बोल रहे हैं कि ये ढाई साल से की गयी तैयारी है जो उनके द्वारा करोड़ों की संख्या में खोले गए जनधन खातों व् बचत खातों के रूप में बड़े जोर-शोर से शेखी के रूप में बघारे जा रहे हैं .

हम खुद ये बात देख रहे हैं कि लोगों के खातों में विशेषकर जन-धन खातों में करोड़ों रूपये किन्हीं के द्वारा डाले जा रहे हैं जिसकी सूचना इ-बैंकिंग होने के कारण लोगों को मिल जा रही है और उनके द्वारा घबराकर इसकी सूचना प्रधानमंत्री को इ-मेल पर दी जा रही है.

* क्या ये विचार का मुद्दा नहीं है कि जनधन खातों की सारी सूचनाएँ बैंकों से कैसे लीक हुई ?

*क्या सरकार को ऐसे में क्लीन चिट दी जा सकती है ?

*और क्यों ऐसे में किन्हीं अन्यों पर शक किया जाये ?

*सरकार पर ही क्यों नहीं ?

क्योंकि सबसे पहले इन खातों का विवरण या तो बैंकों के पास है या फिर सरकार के और काले धन के मामले में ये दोनों ही क्लीन चिट नहीं ले सकते . ऐसे में नोटबंदी के लिए ढाई साल से तैयारी का अमित शाह का दावा स्वयं मोदी के इरादों की पोल खोल रहा है और विपक्ष भले ही पुख्ता तरीके से इनके चेहरों के नकाब नोचकर न हटा पाए किन्तु जनता की पैनी निगाहों के सामने इनका हर राज़ इनके चेहरों की सच्चाई उजागर कर रहा है क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री भी फिल्मों के किसी पात्र से कम नहीं हैं .अपना हर काम फ़िल्मी अंदाज़ में ही वे करते हैं .फ़िल्मी ज़िन्दगी जीते हैं तभी तो फ़िल्मी गाने भी सनसनीखेज अंदाज़ में उनके लिए सच बोलने में शाह का साथ देते हैं -

''लाख छुपा लो छुप न सकेगा राज़ हो कितना गहरा ,

दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा .''

शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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एकदम सच

मुखौटों की राजनीति में यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि किस मुखौटे ने क्या कहा . शानदार लेख .

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