गरीबी

04 फरवरी 2017   |  सत्येन्द्र सिंह   (122 बार पढ़ा जा चुका है)

गरीबी इस कदर मेरे देश मे है यारों,

कि जिन्दगी मोहताज़ है दो वक्त की रोटी के लिए...

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