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इश्क़बाज़

18 फरवरी 2017   |  शैलेन्द्र भरती

 इश्क़बाज़

झूठा ही सही प्यार तो कर।

कमीना साला! अबे!

अनु तू क्यूँ अपनी ज़ुबान ख़राब कर रही है।एक बार अच्छे से साले को झाड़ दो दिमाग़ सही हो जाएगा। हाँ प्रिया! कब तक इसकी बकवास रोज़ सुनती रहूँगी।छिछोरा एक दम कोचिंग के मुहाने पर खड़ा हो जाता है और ताने मारता है।इस मजनूँ की औलाद को तो मैं ठीक करूँगी। बड़ा वेल्ला टाइम रहता है तेरे पास।जा घर जाकर काम वाम कर।चल फूट यहाँ से।-अनु झिड़कते हुए बोली। अरे अनु जी आपके लिए मेरे पास इतना वक़्त है-इतना वक़्त है,जितना कचड़ा उठाने वाली जेसीबी मशीन को देखने के लिए खड़े 20-25 लोगों के पास होता है।तेरे ही सपने देख रहा हूँ और मेरे पास काम है क्या? अनु चल तू यहाँ से-प्रिया अनु का हाथ खींच कर लेती गयी वहाँ से। अरे प्रिया उसको तो मेरा नाम भी मालूम है।मुझे तो उसका नाम तक नही मालूम है। हद है यार जाकर पूछ क्यूँ नही लेती है।डेट ऑफ़ बर्थ भी पूछ ले और हाँ टाइम भी पूछ ले काम आएगा कुंडली मिलाने में। अरे यार तू तो सीरीयस हो ली।आख़िर नाम तो लौंडे का पता होना चाहिए ना।जब मैं बूढ़ी हो जाऊँगी तो सोच कर हसूँगी की हाय मेरा एक आशिक़ हुआ करता था जो मेरा पीछा करता था। सुन बेटा बुढ़ौति में हसने के लिए नाती पोते काफ़ी होंगे इस गैंडे से तो अच्छा ही हसाँएँगे।हुह! गैंडा मत बोल।अच्छा है यार।भूरी आँखो वाला गुंडा। हाँ और ये भी जान ले बड़े बुज़ुर्ग कहते हैं भूरी आँखो वालों से मेल जोल नही बढ़ाना चाहिए।कमीने होते हैं। तू बड़ी नानी बन रही है जलनखोर तेरा कोई आशिक़ नही है ना तभी।हुह! क्या बात है आज तो सब गुलाबी हो रहा है।मैचिंग मैचिंग।सलवार सूट नेलपेंट आइलाइनर चूड़ी सैंडल। तुझे क्या करना मैं मैचिंग पहनूँ या ना पहनूँ यही सैंडल दूँगी खींच कर। अरे यार इधर मेरे हाथ का रंग बॉडी के रंग से मैच नही करता जलन तो होगी ही कोई मैचिंग चीज़ सामने आए तो। साला कुत्ता कमीना। पाल लो ना इस कुत्ते को।वफ़ादार निकलेगा अनु जी। चल यार अनु तू रोज़ इसके मुँह क्यूँ लगती है। अरे प्रिया जी ये मुँह लगे यही तो मेरी चाहत है। हद है यार तू चल यहाँ से।-प्रिया अनु को खिंचते हुए बोली। सोची थी की आज हाफ़ ईयरली इग्ज़ाम का रिज़ल्ट आएगा।कुछ अच्छा पहन कर चलूँ।पर इस पागल ने कालेज गेट पर ही मूड ख़राब कर दिया। तू छोड़ ना तू इग्ज़ाम टॉप की होगी सिर्फ़ अपने सेक्शन में ही नही पूरे कोलेज में।तू लिखवा ले अभी मुझसे। हाँ यार! मैं भी बहुत कॉन्फ़िडेंट हूँ रिज़ल्ट को लेकर।होप सो। अरे अनु ये देख नोटिस बोर्ड पर लिस्ट लग गयी है।अभी सिर्फ़ सेक्शन वाइज़ लिस्ट आयी है। देख देख मेरा नाम कहाँ है? तू भी ना कैसी बातें कर रही है।ये पूछ प्रिया तेरा नाम है की नही है इसमें।तेरा तो हमेशा की तरह सबसे ऊपर है वो देख अनु 89%। वाउ! अब जल्दी से पूरे सेक्शन की कमबाइंड लिस्ट देखने दे।फिर घर पर फ़ोन करके बताऊँगी। अरे इतनी भी जल्दी क्या है अनु जी।पहले एक दूसरे को जान पहचान ले फिर घर पर बता दीजिएगा।वैसे आज मौसम भी गुलाबी है।मेरा दिल भी गुलाबी हो रहा है आपके गालों की तरह। क्या चाहते हो तुम प्रिन्सिपल के पास जाना या थाने में।जहाँ बोलोगे वहाँ पहुँचा दूँगी मिनटों में।अभी जानते नही हो तुम मुझे। अरे नाम तो जानता ही हूँ और एक बार अपने दिल पर आप हाथ रख कर आँख बंद करके सोच लीजिए फिर जहाँ आपका दिल बोले आप मुझे वहाँ पहुँचा दीजिएगा।वैसे दिल आपका यही बोलेगा की इस बंदे को दिल में ही रख लो।क़सम से। कमीना!- अनु पैर झटकते हुए वहाँ से चली गयी। एक बात बोलूँ अनु तू भी कम नही है।मुझे तो लगता है की तू जानबूझकर उसके मुँह लगती है। प्रिया तू चुपकर।कुछ भी बोलेगी। कितना भी चुप करा ले मुझे।लेकिन यही हक़ीक़त है कोई इतने प्यार से भी किसी को डाँटता है क्या? जितने प्यार से तू डाँटती है।और जो ग़ुस्सा होने का नाटक करती है वो भी साफ़ साफ़ झलकता है तेरी आँखो से की नक़ली ग़ुस्सा है।और एक बात और बता अगर इतना ही वो परेशान कर रहा है तुझे तो तू कम्प्लेन अभी तक क्यूँ नही की।बोल अब? छोड़ ना प्रिया।वो अच्छा लड़का है कम्प्लेन करूँगी तो करियर ख़राब हो जाएगा उसका। अनु ये प्यार है या हमदर्दी? क्या समझा जाए इसको? माई फूट! तुझे जो समझना है समझ।मैं चली फ़ाइनल लिस्ट देखने। प्रिया यार मेरा तो नाम ही दूसरे नम्बर पर है। क्या बात कर रही है हट मुझे देखने दे। हाँ रे तू तो सेकंड आयी है कॉलेज में। लेकिन ये फ़र्स्ट वाला लड़का इतने नम्बर कैसे पा गया यार। हाँ बेबी! नवीन भटनागर 97% पर और अनु अरोरा सीधे 89% पर।इतना अंतर कैसे यार? दोनो हैरानी भरी नज़र से एक दूसरे को देखती ही रही। मैडम जी हर सफल आदमी के पीछे किसी लड़की का हाथ होता है।हो सकता है उसका प्यार हो उसके पीछे जो उसको टॉप पर पहुँचा दिया। और हर असफल आवारा आशिक़ के पीछे भी एक लड़की का हाथ होता है जो उसको टॉप पर नही सीधे जेल में पहुँचा देता है।ये आख़री चेतावनी है मेरी है अगर इसके बाद तुम मेरे आसपास भी भटके तो वही मिलोगे जेल में।गॉट ईंट। आइ लव यू टू बाय बाय।सी यू। यार प्रिया बहुत रोना आ रहा है।एक तो सेकंड आयी हूँ ऊपर से ये पागल दुखी करके रखा हुआ है।ऐसे ही करता रहेगा तो मुझे भी आइ लव यू टू बोलना पड़ जाएगा। चुप कर पगली घर चल।पगला गयी है तू। अरे आज तुम्हारी सहेली कहाँ गयी? तुझे क्या करना है उससे? हाँ मुझे क्या करना है उससे।मुझे तो तुमसे मतलब है।तुम्हीं तो हो जो मेरे रातों की नीद उड़ा रखी हो। हाँ तो मेरे से किसी टिपिकल हिंदुस्तानी लड़की टाइप वाले जवाब की उम्मीद मत करना 'तुम भी ना' बोलूँ और शरमा जाऊँ।मैं बस तुम्हारे फ़्यूचर ख़याल करती हूँ नही तो दिखते नही तुम दुबारा। ओके ओके अनु जी! यार इतना ही मेरे फ़्यूचर का ख़याल है तो मेरा प्रपोज़ल ऐक्सेप्ट कर लीजिए ना। प्रपोज़ल माई फूट।तुम जानते हो मैं तुमको कैसे ट्रीट करती जैसे लोग अख़बार को यूज़ करते हैं।एक बार पढ़ते हैं और फिर फेंक देते हैं। अख़बार का बाद में बहुत यूज़ होता है।लेकिन वो तो बाद की बात है एक बार आप पढ़िए तो सही इस अख़बार को।प्रपोज़ल ना सही एक बार दोस्ती का हाथ तो बढ़ाइए। अच्छा फिर तुम ये सब बंद कर दोगे मेरा पीछा करना कॉमेंट पास करना एंड ऑल। बिलकुल तब तो दोस्त हो जाएँगे ना। ठीक है मैं प्रिया से पूछ कर बताऊँगी। दिल आपका दोस्ती आपकी मैं आपका पूछेंगी प्रिया से क्यूँ? एक्सकूज़ मी मिस्टर सिर्फ़ दोस्ती आपकी ये सेकंड थॉट निकाल दीजिए दिमाग़ से।ना आपका दिल मेरा है ना आप मेरे हैं।और रही बात प्रिया की तो वो मेरी ज़िंदगी है और मैं सब काम उससे पूछ कर करती हूँ। ये बात है फिर पूछ लीजिए अपनी ज़िंदगी से।हम भी देखे कितने दिन और ये पूछने का कार्यक्रम आगे चलेगा। चलेगा ज़िंदगी भर।बाय! हेल्लो मिस्टर ये तुम मेरी सहेली को क्यूँ बहला फुसला रहे हो।शक्ल देखो जाकर अपनी शीशे में।चले हैं अनु से दोस्ती करने।आवारा कहीं का। क्यूँ आपकी अनु जी से कोई दूसरे ग्रह का ही दोस्ती कर सकता है।इतनी बेवक़ूफ़ तो वो नही दिख रहीं हैं जो मेरे बहकाने से बहक जाए। डोंट बी ओवर स्मार्ट मिस्टर।तुम उसके सामने कुछ भी नही हो।वो टॉपर है इस कॉलेज की।तुम को क्या पता टॉपर क्या होता है तुम तो आवारा हो ऐसे ही साइकल स्टैंड के पास खड़े रहते हो और आगे जाकर भी ऐसे ही खड़े रहोगे। हाँ तो मुझे तो अच्छा लगता है यहाँ खड़ा होना आख़िर तुम लोगों की साइकल का भी तो ख़याल रखना है और रही बात टॉपर की तो वो लोग क्या किसी से दोस्ती नही करते क्या? उनके पास देने के लिए दिल नही होता क्या? और दोस्ती उससे कर रहा हूँ दिल उसको दे रहा हूँ तुम इतनी तकलीफ़ में क्यूँ हो? प्रकाश डालिएगा कुछ इन सवालों पर प्रिया जी। प्रकाश नही मैं तुम्हारी लाइट ही फुड़वा दूँगी।अगर आगे से उसके आस पास दिखे।वैसे भी मैं आवारा छिछोरे लड़कों के मुँह नही लगती।अब हटो साइकल खड़ी करने दो मुझे। मैं भी सारी लड़कियों को मुँह नही लगाता।जो बात तुम बोल रही हो वो अनु से बोल देना मुझसे बोल कर जाए।मैं फिर परेशान नही करूँगा उसको।माइंड ईंट। हेल्लो मिस्टर लड़कियों के क़रीब वही लोग आ पाते हैं जिनके साथ वो कम्फ़र्ट फ़ील करती है।लेकिन तुम्हारे साथ वो कभी कम्फ़र्ट फ़ील नही करती है तो अपना काम करो इस फ़ालतू के चक्कर को छोड़ कर। तो ये भी नोट कर लीजिए प्रिया मैडम वो आपसे ज़्यादा मेरे साथ कम्फ़र्ट फ़ील करती है अगर आपको अभी नही महसूस हो रहा है तो जल्द ही आपको दिखने लगेगा।और हाँ आप अपना काम कीजिए ये आग लगाने के फ़ालतू के चक्कर को छोड़ कर। हाय' हेल्लो! आज आपकी आवाज़ में इतनी नज़ाकत सहूलियत।मोहतर्मा सब ख़ैरियत तो है ना? आज आपकी पूँछ भी नही दिखाई दे रही है? अरे यार मैं कोई लक्ष्मीबाई हूँ क्या की लड़ती रहूँ और ना मैं अवतार पिक्चर की हीरोईन हूँ की मेरी पूँछ हो। लड़कियाँ टूबलाइट ही होती हैं।मेरा मतलब था वो तुम्हारी सहेली प्रिया।हमेशा पूँछ की तरह पीछे चिपकी रहती थी। ख़बरदार अगर तुम प्रिया के बारे में कुछ बोले मैं फिर कभी बात नही करूँगी तुमसे। अच्छा यार छोड़ो भी।आज इतने महीनो बाद ठीक से बात की हो यही मेरे लिए काफ़ी है। वही तो।यार समझ में नही आ रहा है मैं तुमसे कभी ज़्यादा बात नही की गाली के सिवाय और कुछ मुँह से मेरे निकला नही तुम्हारे लिए।फिर आख़िर ऐसा क्या हुआ मेरे साथ की मैं तुमसे बात कर रही हूँ वो भी अपनी बेस्ट फ़्रेंड को इग्नोर करके।वैसे भी ईवेन तुम्हारा नाम तक मुझे नही पता है। मैडम अनु जी! यही होता है प्यार।कब किससे हो जाए कब हो जाए ये कोई नही जानता। चुप करो मैं यहाँ कोई तुम्हारी फ़िल्मी बातें सुनने नही आयी हूँ।मुझे बस इतना समझना है कि आख़िर क्यूँ आयी हूँ मैं तुमसे बात करने। वही तो मैं भी समझा रहा हूँ की क्यूँ आइ हो तुम यहाँ पर तुमको मेरी बातें फ़िल्मी लगती हैं।ये लो तुम्हारे लिए। इसमें क्या है? खोलो तो सही। ओह्ह्ह्ह ये तो कृष्ण भगवान हैं। हाँ ये प्रेम के देवता! ये हमेशा अपने पास रखना।चाहे आज के बाद तुम मुझसे मिलो या ना मिलो।ये हमेशा तुमको तुम्हारे हर सवाल का जवाब किसी ना किसी तरीक़े से देते रहेंगे। सच्ची! मूच्ची बेबी। शटअप!मैं यहाँ सिर्फ़ ये बताने आयी थी की मैं तुमसे फ़्रेंडशिप कर लूँगी पर मेरी एक शर्त है। लव की जगह फ़्रेंडशिप?उसमें भी शर्त? हाँ! क्यूँकि मैं चाहती हूँ की तुम पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दो बजाय ये आवारागर्दी के ताकि मैं भी कह सकूँ सभी से की ये मेरा दोस्त है और हमारी दोस्ती पर प्रिया क्या किसी और को भी ऐतराज़ ना हो। ओह अनु।बस इतनी सी बात के लिए इतना टाइम लगा दी तुम।अगर तुम मुझे सिर्फ़ इस बात के लिए छोड़ के जाती की मैं आवारा हूँ तो शायद अगर तुम कभी ज़िंदगी में वापस मिलती भी तो मैं तुम्हें कभी नही अपनाता।लेकिन तुमने मुझसे दोस्ती का हाथ सिर्फ़ आवारा समझ के बढ़ाया है तो ये भी समझ लो की मैं तुम्हारा साथ मरते दम तक नही छोड़ूँगा।मैं अच्छा भी तुम्हारे लिए हूँ और आवारा भी सिर्फ़ तुम्हारे लिए।एक बार उस गिफ़्ट पर लगे लेबेल पर नाम तो पढ़ो। 'नवीन भटनागर' मीन्स तुमने ही कॉलेज टॉप किया है।ओह माई गॉड।तुम ही वो नवीन हो। हाँ अनु तुम्हारा नवीन वही है। तुम तो इश्क़बाज़ निकले। चलो ग़नीमत है इस बार आवारा नही बोली तुम।


By:-शैलेन्द्र भारती(कुन्दन कुमार सुमन)


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