धरम का .....दिया बुझाके चल दिये

22 फरवरी 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (165 बार पढ़ा जा चुका है)

धरम का .....दिया बुझाके चल दिये

कविवर गोपाल दास ''नीरज''ने कहा है - ''जितनी देखी दुनिया सबकी दुल्हन देखी ताले में कोई कैद पड़ा मस्जिद में ,कोई बंद शिवाले में , किसको अपना हाथ थमा दूं किसको अपना मन दे दूँ , कोई लूटे अंधियारे में ,कोई ठगे उजाले में .'' धर्म के ये ही दो रूप हमें भी दृष्टिगोचर होते हैं .कोई धर्म के पीछे अँधा है तो किसी के लिए धर्म मात्र दिखावा बनकर रह गया है .धर्म के नाम पर सम्मेलनों की ,विवादों की ,शोर-शराबे की संख्या तो दिन-प्रतिदिन तेजी से बढती जा रही है लेकिन जो धर्म का मर्म है उसे एक ओर रख दिया गया है .आज जहाँ देखिये कथा वाचक कहीं भगवतगीता ,कहीं रामायण बांचते नज़र आयेंगे ,महिलाओं के सत्संगी संगठन नज़र आएंगे .विभिन्न समितियां कथा समिति आदि नज़र आएँगी लेकिन यदि आप इन धार्मिक समारोहों में कथित सौभाग्य से सम्मिलित होते हैं तो ये आपको पुरुषों का बड़े अधिकारियों, नेताओं से जुड़ने का बहाना ,महिलाओं का एक दूसरे की चुगली करने का बहाना ही नज़र आएगा . दो धर्म विशेष ऐसे जिनमे एक में संगीत पर पाबन्दी है तो गौर फरमाएं तो सर्वाधिक कव्वाली,ग़ज़ल गायक आपको उसी धर्म विशेष में मिलेंगे और एक अन्य धर्म के प्रवचन स्थल पर उन उपदेशों को दरकिनार कर उनके ही धर्मावलम्बियों का बड़ी संख्या आगमन भी दिखेगा . धर्मान्धता देखकर ही कबीर दास ने कहा था - ''पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूजूं पहार , ताते ये चाकी भली ,पीस खाए संसार .'' ''कांकर पाथर जोरि के मस्जिद लई बनाये , ता चढ़ी मुल्ला बाँगी दे ,क्या बहरा हुआ खुदाए .'' इन धर्मों के कामों में यदि कुछ कहा जाये तो बबाल पैदा हो जाते हैं और न कहने पर जो शोर-शराबे की मार पड़ती है वह असहनीय है .लाउडस्पीकर ,जेनरेटर,डी.जे.जैसे अत्याधुनिक यंत्रों के प्रयोग ने आज जनता को वास्तव में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के रूप में सिरदर्द दे दिया है .रोज कोई न कोई आयोजन है और प्रतिदिन उपदेशों के नदियाँ बह रही हैं .फिर भी देश समाज के हाल बेहाल हुए जा रहे हैं . कहीं भजन बजता है - ''भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना , पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बनकर मत रहना .'' लोग गाते हैं गुनगुनाते हैं ,तालियाँ बजाते हैं और करते क्या हैं वही जो करना है -लूट -खसोट ,इधर का मॉल उधर -उधर का मॉल इधर .चारों ओर ढकोसले बाजी चल रही है ..भगवा वेश में २५-३० लोगों की बस रोज किसी न किसी शहर में पहुँचती है ,दिन निर्धारित है किस किस दिन आएंगे .भगवा वस्त्र पहनकर आते हैं लोगों से, दुकानदारों से धार्मिक भावना के नाम पर ५०-५० पैसे लेते हैं और अपने अड्डे पर पहुंचकर शराब ,जुए,भांग में उड़ाते हैं .धर्म आज ऐसे ही दिखावों का केंद्र बनकर रह गया है . जगह जगह आश्रम खुले हैं .अन्दर के धंधे सभी जानते हैं यही कि ये आश्रम राजनीति ज्ञों के दम पर फल फूल रहे हैं और आम जनता बेवकूफ बन उन साधू महात्माओं के चरण पूज रही है .जिनके काले कारनामे आये दिन सभी के सामने आ रहे हैं .कहने को इन साधू संतों को सांसारिक माया-मोह से कुछ लेना -देना नहीं और सांसारिक सुख सुविधा का हर सामान इनके आश्रमों में भरा पड़ा है .दिन प्रतिदिन आश्रमों की चारदीवारी बढती जा रही है और कितने ही अपराधिक कार्य यहाँ से संचालित किये जाते हैं और प्रशासन जनता में इनके प्रति निष्ठा के कारण उसके भड़कने की आशंका से इनपर हाथ डालते हुए घबराते हैं और इसी का दुष्प्रभाव है कि आज जनता की धर्मान्धता का लाभ उठाकर ये आश्रम बहुत बड़े क्षेत्र को निगलते जा रहे हैं . इसी कारण लगता है कि आज धर्म भी जनता से अपना पीछा छुड़ाने के मूड में है क्योंकि जो काम आज धर्मस्थलों से संचालित हो रहे हैं और धर्म के नाम पर संचालित किये जा रहे है उन्हें हमारे किसी भी धर्म ने महत्व नहीं दिया .इसलिए लगता है कि धर्म भी आज यही कह रहा है - ''वो आये मेरी कब्र पे दिया बुझाके चल दिए , दिए में जितना तेल था सर पे लगाके चल दिए .'' शालिनी कौशिक [कौशल ]

अगला लेख: माँ ......खुदा की कुदरत



हर लेख में कुछ नया होता है और बेहतरीन कहावतों का इस्तेमाल करती हैं आप . बहुत ही सही बात कही . आज धर्म भी किसी धंधे से काम नहीं

वाह

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
28 फरवरी 2017
मंडप भी सजा ,शहनाई बजी ,आई वहां बारात भी ,मेहँदी भी रची ,ढोलक भी बजी ,फिर भी लुट गए अरमान सभी .समधी बात मेरी सुन लो ,अपने कानों को खोल के ,होगी जयमाल ,होंगे फेरे ,जब दोगे तिजोरी खोल के .आंसू भी बहे ,पैर भी पकड़े ,पर दिल पत्थर था समधी का ,पगड़ी भी रख दी पैरों में ,पर दिल न पिघला समधी का .सुन लो समधी
28 फरवरी 2017
15 फरवरी 2017
हाइकु 5-7-5 के क्रम वाली क्षणिक कविता है और इसमें एक क्षण को उसकी सम्‍पूर्णता सहित अभिव्‍यक्‍त किया जाता है। इस वीडियो में बुढ़ापा के विषय में कुछ हिन्‍दी हाइकु दे रहे हैं। विश्‍वास हैं अवश्‍य पसन्‍द आएंगे। पसन्‍द आने पर लाईक, कमन्‍ट, शेयर व सब्‍सक्राईब करें। धन्‍यवाद ! बुढ़ापा (Senility) BuDhaapaa
15 फरवरी 2017
08 फरवरी 2017
ये सर्वमान्य तथ्य है कि महिला शक्ति का स्वरुप है और वह अपनों के लिए जान की बाज़ी लगा भी देती है और दुश्मन की जान ले भी लेती है.नारी को अबला कहा जाता है .कोई कोई तो इसे बला भी कहता है किन्तु यदि सकारात्मक रूप से विचार करें तो नारी इस स्रष्टि की वह रचना है जो शक्ति का साक्षात् अवतार है.धेर्य ,सहनशी
08 फरवरी 2017
04 मार्च 2017
बॉलीवुड स्टार्स के किड्स भी स्टार की तरह ही अटेंशन पाते हैं। शाहरुख खान के बच्चे आर्यन, सुहाना, या अबराम हो, अक्षय कुमार के बेटे आरव या बिग बी की नातिन नव्या नवेली हो वो हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ स्टार्स किड्स ऐसे भी हैं जो शायद ही कभी ला
04 मार्च 2017
26 फरवरी 2017
सुवचन सकारात्‍मक होते हैं अौर दिशा निर्धारित करते हैं। सुपथ दिखाते हैं अौर लक्ष्‍य प्राप्ति में सहायक होते हैं। आज का सुवचन का शीर्षक 'ध्‍यान' है!Video को LIKE और हमारे CHANNEL को SUBSCRIBE करना ना भूले ! JYOTISH NIKETAN SANDESH: ध्‍यान
26 फरवरी 2017
04 मार्च 2017
औरतें आज भी घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। आज भी लोगों में इतना पिछड़ापन है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक बात तो एकदम तय है कि औरतें अपने हक के लिए सदियों से लड़ती आ रही हैं और न जाने कितनी पीढ़ीयों तक लड़ेंगी। आज भी कई ऐसी जगहे हैं जहां बात जब औरतों आती है तो लोग यही सोच लेते हैं कि औरत एक
04 मार्च 2017
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x