बिहार के छात्र ने बनाई केले के तने से बिजली, दुनिया कर रही है सलाम

28 फरवरी 2017   |  रोमिश ओमर   (364 बार पढ़ा जा चुका है)

बिहार के छात्र ने बनाई केले के तने से बिजली, दुनिया कर रही है सलाम

New Delhi : अपने देश में कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने अपने अविष्कारों से दुनिया के लोगों को चकित कर दिया है, हाल ही में ऐसा ही एक आविष्कार अपने ही देश के एक युवक ने केले के तने से बिजली बना कर किया है।

बिहार के केलाचल के नाम से प्रसिद्ध जिला नवगछिया के एक युवक ने केले के तने से बिजली बना कर लाखों लोगों को हैरत में डाल दिया है और अपने इस प्रोजेक्ट को उसने 'बनाना बायो सेल' नाम दिया है। इस युवक का नाम गोपाल है और यह तुलसीपुर जमुनिया में 12वीं कक्षा का विद्यार्थी है। इस लड़के के पिता का नाम प्रेम रंजन हैं और वे एक केला व्यापार ी और किसान है, यहीं से गोपाल को केले के तने से बिजली बनाने की प्रेरणा मिली।

गोपाल को अपनी इस खोज के लिए नेशनल इंस्पायर अवार्ड के लिए बिहार टीम में सलेक्ट किया गया है। बिहार के नवगछिया इलाके में हर साल केले के हजारों टन अवशिष्ट बर्बाद हो जाते हैं पर गोपाल के इस प्रयोग से अब ऐसे पदार्थों का उपयोग बिजली बनाने में किया जाएगा तथा आम आदमी की बिजली की किल्लत को दूर किया जा सकता है।

गोपाल अपने पिता से मिले बिजली बनाने के आइडिया के बारे में कहते हैं कि केले का रस किसी कपड़े पर लग जाए तो उसके दाग नहीं छूटते थे। एक दिन उसने अपने पिता से इसका कारण पूछा। पिता ने उसे बताया कि केले के रस की यह प्रकृति एसिड जैसी है। तभी उसके मन में रसायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने का आइडिया आया। गोपाल ने अपने इस आइडिया से एलईडी बल्ब जलाकर दिखया, इस बारे में गोपाल बताते हैं कि केले के थंब में प्राकृतिक रूप से सैट्रिक एसिड पाया जाता है।

घर में इनवर्टर जैसे उपकरणों में प्रयोग होने वाली बैट्री में भी एसिड में दो अलग-अलग तत्व के इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। इसको आधार बनाकर ही (बनाना बायो सेल) का निर्माण किया है। केले के थंब को जिंक और कॉपर के दो अलग-अलग इलेक्ट्रोड से जोड़ दिया। इलेक्ट्रोड जोड़ने के साथ ही इसमें करंट आने लगा और इसमें एलईडी बल्ब लगाकर जलाया गया। जानकारी के लिए आपको यह भी बता दें कि गोपाल राज्यस्तरीय इंस्पायर अवार्ड 2016 में बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा भी सम्मानित हो चुका है।

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बिहार के छात्र ने बनाई केले के तने से बिजली, दुनिया कर रही है सलाम

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जेपी हंस
04 मार्च 2017

इसे व्यवहारिक रूप मे अमल किया जाना है।

रेणु
04 मार्च 2017

सरकार को ऐसे उत्साही और देश हित में काम करने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए -- और उनके आविष्कारो को देश वा समाज के लिए मान्यता दे |

इस प्रकार की घटना किसी व्यक्ति की मौलिकता का द्योतक होती हैं | किंतु आविष्कार व्यावहारिक दॄष्टि से उपयोगी होगा इसकी उम्मीद कम ही की जा सकती है |
इस विषय पर मेरा कहना है की केले के रस में कितना एसिड (तेज़ाब) - प्रस्तुत मामले में साइट्रिक एसिड - होगा यह मैं नहीं जानता | इतना जरूर बताना चाहता हूं कि यह तेज़ाब प्रायः सभी फलों में पाया जाता है, खास तौर पर नींबू में बहुत अधिक | यह भी जानना जरूरी है की इस कार्य में एक प्रमुख पदार्थ है जिंक| इसलिए शंका है की प्रकिया से प्राप्त बिजली महंगी होगी जब अन्य तेज़ाब बहुतायत में प्राप्य हों | मेरा यह भी कहना है की जिन तेजाबों (और जिंक) से बिजली बनाई जा सकती है वे पानी में घुलनशील होती हैं, और वे दाग नहीं छोड़ सकते है | दाग का कारण वे रसायन होते हैं जो किसी सतह (यथा कपडेसे के तंतुओं की सातह) पर चिपक जाते हैं | विज्ञान में इसे अडेजन adhesion कहा जाता है |

जय हिन्द

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