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दहेज लोभियों को सबक

28 फरवरी 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट

दहेज लोभियों को सबक

मंडप भी सजा ,शहनाई बजी ,

आई वहां बारात भी ,
मेहँदी भी रची ,ढोलक भी बजी ,
फिर भी लुट गए अरमान सभी .
समधी बात मेरी सुन लो ,अपने कानों को खोल के ,
होगी जयमाल ,होंगे फेरे ,जब दोगे तिजोरी खोल के .
आंसू भी बहे ,पैर भी पकड़े ,
पर दिल पत्थर था समधी का ,
पगड़ी भी रख दी पैरों में ,
पर दिल न पिघला समधी का .
सुन लो समधी ये भावुकता ,विचलित न मुझे कर पायेगी ,
बेटे पर खर्च जो मैंने किया ,ये मुझको न दे पायेगी .
देख पिता की हालत को ,
बेटी का घूंघट उतर गया .
सम्मान जिन्हें कल देना था ,
उनसे ही माथा ठन गया .
सुन लो बाबूजी बात मेरी ,अब खुद की खैर मना लो तुम ,
पकड़ेगी पुलिस तुम्हें आकर ,खुद को खूब बचा लो तुम .
सुनते ही नाम पुलिस का वे ,
कुछ घबराये ,कुछ सकुचाये ,
फिर माफ़ी मांग के जोड़े हाथ ,
बोले रस्मे पूरी की जाएँ .
पर बेटी दिल की पक्की थी ,बाबूजी से अड़कर बोली ,
अब शादी न ये होगी कभी ,बोलो चाहे मीठी बोली .
ए लड़की !बोलो मुँह संभाल ,
तू लड़की है ,कमज़ोर है ,
हम कर रहे बर्ताव शरीफ ,
समझी तू शायद और है .
बेटी से ऐसी भाषा पर ,बाप का क्रोध भी उबल पड़ा ,
समधी को पकड़ के खुद ही पुलिस में देने चल पड़ा .
आ गयी पुलिस , ले गयी पकड़ ,
लालच के ऐसे मारों को ,
देखा जिसने की तारीफें ,
अच्छा मारा इन यारों को .
लड़के वाला होने का घमंड ,जब हद से आगे जायेगा ,
बेटे का बाप बारातों संग ,तब जेले ही भर पायेगा .
बेटी ने लाकर पगड़ी को ,
पिता के शीश पर रख दिया .
पोंछे आंसू माँगा वादा ,
दुर्बल न होगा कभी जिया .
बदलेंगे सोच अगर अपनी ,कानून अगर हम मानेंगे ,
तब बेटी को अपने ऊपर न बोझ कभी हम मानेंगे .
सबक दहेज़ के दानवों को ,गर यूँ बढ़कर सिखलाएंगे ,
सच्चे अर्थों में हम जीवन बेटी को तब दे पाएंगे .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

दहेज लोभियों को सबक
दहेज लोभियों को सबक

शालिनी कौशिक एडवोकेट

कहते हैं ये जीवन अनेकों रंगों से भरा है संसार में सभी की इच्छा होती है इन रंगों को अपने में समेट लेने की मेरी भी रही और मैंने बचपन से आज तक अपने जीवन में अनेकों रंगों का आवागमन देखा और उन्हें महसूस भी किया .सुख दुःख से भरे ये रंग मेरे जीवन में हमेशा ही बहुत महत्वपूर्ण रहे .एक अधिवक्ता बनी और केवल इसलिए कि अन्याय का सामना करूँ और दूसरों की भी मदद करूँ .आज समाज में एक बहस छिड़ी है नारी सशक्तिकरण की और मैं एक नारी हूँ और जानती हूँ कि नारी ने बहुत कुछ सहा है और वो सह भी सकती है क्योंकि उसे भगवान ने बनाया ही सहनशीलता की मूर्ति है किन्तु ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही सहनशील होती है मैं जानती हूँ कि बहुत से पुरुष भी सहनशील होते हैं और वे भी बहुत से नारी अत्याचार सहते हैं इसलिए मैं न नारीवादी हूँ और न पुरुषवादी क्योंकि मैंने देखा है कि जहाँ जिसका दांव लग जाता है वह दूसरे को दबा डालता है.

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लेखक 1
Kokilaben Hospital India
08 मार्च 2018

We are urgently in need of kidney donors in Kokilaben Hospital India for the sum of $450,000,00,For more info
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ईमेल: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
व्हाट्सएप +91 779-583-3215

इसके लिए माता- पिता से ज्यादा उत्तरदायी स्वयम में वह लड़का होता है जिसकी शादी होती है
इस पर रोकथाम तभी लग सकता है जब वह लड़का इसका विरोध करे

सहमति सहित आभार

रेणु
01 मार्च 2017

प्रेरणा से भरभूर प्रसंग --

प्रेरणादायी

दहेज लेने वाले को कड़ी सजा होनी चाहिए|

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