वसंत

07 मार्च 2017   |  विश्वमोहन   (89 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन घट में कुसुमाकर ने,

रस घोला है फिर चेतन का /

शरमायी सुरमायी कली में,

शोभे आभा नवयौवन का //


डाल डाल पर नवल राग में,

प्रत्यूष पवन का मृदु प्रकम्पन/

लतिका ललना की अठ खेल ी में,

तरु किशोर का नेह निमंत्रण //


पत्र दलों की नुपुर ध्वनि सुन,

वनिता खोले घन केश पाश /

उल्लसित पादप पुंज वसंत में,

नभ में तैरे उर उच्छवास //


मिलिन्द उन्मत्त मकरन्द मिलन मे,

मलयज बयार मदमस्त मदन में/

चतुर चितेरा चंचल चितवन में,

कसके हुक वक्ष-स्पन्दन में//


प्रणय पाग की घुली भंग,

रंजित पराग पुंकेसर रंग/

मुग्ध मदहोश सौन्दर्य सुधा,

रासे प्रकृति पुरुष संग //


पपीहे की प्यासी पुकार में,

चिर संचित अनुराग अनंत है/

सृष्टि का यह चेतन क्षण है,

अलि! झूमो आया वसंत है //


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रेणु
08 मार्च 2017

फूलों सी सुकोमल पदावली से भरा बसंत गान अद्भुत है -- शुभकामना

विश्वमोहन
08 मार्च 2017

विनम्र प्रणाम एवं सादर धन्यवाद !

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