देश भक्ति दिखाने के चक्कर में यह विश्वविद्यालय कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गया!

10 मार्च 2017   |  प्रियंका शर्मा   (455 बार पढ़ा जा चुका है)

देश भक्ति दिखाने के चक्कर में यह विश्वविद्यालय कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गया!

अपने देश को महान हर कोई दिखाना चाहता है, लेकिन ऐसा करने के लिए आप तथ्यों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। लेकिन बड़ौदा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ने अपनी वार्षिक पत्रिका में कुछ ऐसी बातें लिख दी हैं जो गले से नीचे नहीं उतरतीं।

आप अक्सर ही कई चीज़ों के बारे में सुनते होंगे कि कैसे उनका आविष्कार पहले भारत में हुआ और फिर वो दूसरे देशों तक पहुंचा। लेकिन इस विश्वविद्यालय की डायरी में कुछ ऐसी चीज़ों के भारत में आविष्कार की बात की गई है जिनके लिए हमारा देश अभी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहा है।

भारत के संतों ने न्यूक्लियर एनर्जी, विमान, रॉकेट आदि का आविष्कार किया था

इस विश्वविद्यालय की पत्रिका में ऐसा कहा गया है कि सालों पहले भारत के संतों ने न्यूक्लियर एनर्जी, विमान, रॉकेट आदि का आविष्कार किया था। उदाहरण के लिए आचार्य कनद को न्यूक्लियर एनर्जी इजात करने का श्रेय दिया गया है वहीँ दूसरी तरफ़ कपिल मुनि को 'कॉस्मोलॉजी का पिता' कहा गया है।

इस पत्रिका के मुताबिक़ महर्षि भारद्वाज ने रॉकेट और विमान का आविष्कार किया और गर्ग मुनि को तारों का वै ज्ञान िक कहा गया है। वहीं कुछ ऐसे संतों की बात भी की गई है जिनको सच में कुछ आविष्कारों का श्रेय जाता है। जैसे सुश्रुत को कॉस्मेटिक सर्जरी का पिता कहा गया है और चारक ऋषि को दवाइयों का पिता कहा गया है।

ये डायरी हवाइज़ादा फ़िल्म बनाने वाले को पढ़नी चाहिए

वहीं दूसरी तरफ़ कुछ गणितज्ञों की बात भी की गई है। इससे सम्बंधित लोगों ने कहा कि ये तथ्य आरएसएस की किताब से लिए गए हैं। कुछ तथ्य शिक्षा बचाओ आंदोलन से ले गए हैं। अजय अष्टपुत्र जो कि फैकल्टी ऑफ़ परफॉर्मिंग आर्ट्स के डीन हैं, कहा कि ये नाम जिग्नेस सोनी द्वारा सुझाए गए थे जो कि एम एस यू के सदस्य हैं।

इनके पिता बापू भाई सोनी गुजरात जन संघ के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इन बातों को मानना ही था क्योंकि ये ऑर्डर ऊपर से आए थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इन तथ्यों से असहमत हो सकते हैं लेकिन बहुत से लोग इनपर विश्वास करते हैं। इसके बाद वो कहते हैं कि ये हमारे पूर्वज हैं और हमें इनपर गर्व होना चाहिए। किसी को इन नामों से दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

ये डायरी हवाइज़ादा फ़िल्म बनाने वाले को पढ़नी चाहिए।


http://www.firkee.in/fun/this-university-in-baroda-is-telling-lies-about-country?pageId=2

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ह म बे शरम हैं बे म

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