आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x

बेटी अपने फर्ज को पूरा जरुर करती हैं ? एक बेटी के फर्ज की कहानी

19 मार्च 2017   |  प्रदीप कुमार

बेटी अपने फर्ज को पूरा जरुर करती हैं ? एक बेटी के फर्ज की कहानी

शहर के अस्पताल में अजय का उपचार चलते-चलते 15-16 दिन हो गएँ थे|लेकिन उसकी तबीयत में कोई सुधार देखने को मिल रहा था| आईसीयू वार्ड के सामने परेशान दीपक लगातार इधर से उधर चक्कर पर चक्कर लगा रहे थे |कभी बेचैनी में आसमान की तरफ दोनों हाथ जोड़ कर भगवान से अपने बेटे की जिन्दगी की भीख मांगते तो कभी फर्श पर बैठकर फुट-फुट कर रोने लग जाते | उधर अस्पताल के एक कोने में अजय की माँ भी अपने बेटे के लिएँ भगवान से दुआ मांगती रहती थी | तभी आईसीयू से डॉक्टर साहब बाहर निकले तो दीपक उनके पीछे-पीछे दैडे और उनके पैर पकड़ का गिड़गिड़ाते हुए कहने लगे,डॉक्टर साहब मेरे बच्चे को बचा लो |कुछ भी करो |पर उसके इलाज में कोई भी कमी नहीं आनी चाहिएँ |"डॉक्टर अभिनव ने उन्हें उठाकर कहाँ देखिए अंकल हम आपके बेटे को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं |उसकी तबीयत अब भी बहुत खराब हैं |इसका जल्द से जल्द ऑपरेशन करना पड़ेगा |जिसके के लिएँ कम से कम कुल 5 लाख तक खर्चा आएगा | आप वो पैसे काउंटर पर जमा करा दो हम ऑपरेशन शुरू करते हैं |


कैसे भी हो आप मेरे बेटे को बचा लो साहब में पैसो का इन्तजाम एक-दो दिन में कर दूँगा |दीपक ने डॉक्टर के हाथ जोड़ कर कहाँ |काफी भाग दोड करने के बाद भी दीपक सिर्फ 2 लाख रुपय का ही इन्तजाम कर पाया था |तो परेशान दीपक ने अपनी बेटी शीतल को फोन किया |लेकिन फोन उसके दामाद ने उठाया हेल्लो कोन दीपक बेटा में तुम्हारा ससुर बोल रहा हूँ |रवि(दामाद) हाँ बोलियें पिता जी कैसे हो आप बेटा अजय की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है |डॉक्टर ने कहाँ की ऑपरेशन करना पड़ेगा |जिसमें 5 लाख रुपयों का खर्चा है |हमसे तो 2 लाख रूपए ही हुए हैं |अगर तुम कुछ पैसे ले आते तो |रवि देखिएँ पिताजी आप चिंता ना करे में तो नहीं आ सकता लेकिन में शीतल को तीन लाख रुपयों के साथ भेज देता हूँ | दुसरे दिन सुबह ही शीतल 3 लाख रुपयों के साथ अस्पताल पहंच गई | आख़िरकार सफल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने अजय को बचा ही लिया |

अब अजय की पढाई शुरू हो गई और उसने इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की(इसके लिएँ कुछ जमीन बेचनी पड़ी ) और इसी बीच 10 साल गुजर गए | और अजय की गोवा एयरपोर्ट पर नौकरी लग गई |और अजय ने अपने साथ काम करने वाली लड़की अंजली से शादी कर ली |और वहीँ रहेने लग गया |कुछ दिनों के बाद अजय ने अपने माता -पिता के घर आना बंद कर दिया |कई बार उसके पिता की तबीयत खराब हुई और माँ ने अजय को फोन भी किया लेकिन अजय नहीं आया |अब तो उसका किसी त्यौहार पर फोन भी नहीं आता था |एक दिन जब अजय के पिता खाना खा रहे तो तो इसी बीच फोन की घंटी बजी फोन उठाकर सुना तो अजय था |बोला कैसे हो आप सब सब ठीक तो है न |पापा मुझे एक परेशानी आ गई है इसके लिएँ मुझे 11 लाख रुपय चाहिएँ में कल आ रहा हूँ |आप पैसे तैयार रखना |दीपक बेटा तेरे ऑपरेशन में शीतल से 3 लाख रूपए लिएँ थे में वो अभी तक नहीं चूका पाया हूँ |तो तेरे लिएँ 11 लाख रूपए कहाँ से दे पाउँगा |बेटा मुझे माफ़ करना में इतने पैसो का इन्तजाम नहीं कर पाउँगा |इसके बाद दीपक कुछ और बोल पाते अजय गुस्से में भड़क उठा |पापा मुझे आपसे यही उम्मीद थी मुझे पता था की आप यही कहेगें |आपने जिन्दगी में मेरे लिएँ किया ही क्या है |जो अब करेगें |और अजय ने फोन काट दिया | अपने बेटे की ऐसी बात सुनकर दीपक को गहरा सदमा लगा |अब वो गुस्से में गुमसुम रहने लगे |सारे दिन घर में पड़े बडबडाते रहते |

एक दिन अचानक सुबह सीने में तेज दर्द होने लगा और नीचे जमीन पर गिर पड़े तो पत्नी ने पलंग पर बड़ी मुश्किल से लेटा दिया |उपमा(पत्नी) ने किसी से कह कर डॉक्टर को घर पर जल्दी आने को कहा |डॉक्टर साहब आये और जाचं की और कहाँ की इनकी तबीयत ज्यादा खराब है |इनको शहर में किसी बड़े अस्पताल में दिखाना पड़ेगा |अपने गाँव के नजदीक जिला अस्पताल में सारी जांचों और रिपोर्टों को देखने के बाद सीनियर डॉक्टर ने उपमा को अलग भुला कर कहाँ की अब इनका इलाज नहीं हो सकता |आप इनकी घर पर रह कर ही सेवा करों |डॉक्टर साहब की बात सुनकर उपमा घबरा गई और उसने अजय को फोन किया और अपने पापा से मिलने की कहीं और कहाँ की बेटा इस बार उनकी तबीयत बहुत खराब है शायद ये उनका आखरी वक्त भी हो सकता है |तुम कुछ दिनों के लिएँ घर आ जाओ |इतनी बात उनकर अजय ने काफी भला-बुरा कह दिया | और गुस्से में यहाँ तक कह दिया की आप लोगों से मेरा कोई रिश्ता नहीं है |और न ही मुझ से आज के अंदर पैसे मांगना और न ही फोन करना |इस बात को अपने दिमाग में अच्छे तरह से बैठा लो सुनाआपने,और फोन काट दिया |

अपने बेटे की ऐसी बात सुनकर उपमा घबरा गई |और पसीने से लथपथ चकरा कर जमीन पर बैठ गई |कुछ देर बाद अपने आपको समाला और अगले दिन मन करकर अपनी बेटी शीतल को फोन किया |हेल्लो बेटी शीतल !सुनो बेटी तुम्हारे पिताजी की तबीयत बहुत खराब हैं |अगर हो सके तो तुम और अपने पति को लेकर कुछ दिनों के लिएँ यहाँ आ जाओ तुम्हारे पिताजी तुम्हे बहुत याद कर रहे हैं |उधर से बेटी ने तुरंत जवाब दिया और कहाँ की माँ

दोस्तों इस कहानी को पूरा पढने के लिएँ नीचे लिंक पर click करें |और इस कहानी को पूरा पढ़े :-

बेटी अपने फर्ज को पूरा जरुर करती हैं ? एक बेटी के फर्ज की दास्ता

http://gosahayatablog.blogspot.com/2017/03/beti-apne-farj-ko-pura-jarur-karti-hai-hindi-story.html


शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
प्रश्नोत्तर
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x