फूल.....

21 मार्च 2017   |  सौम्य स्वरूप नायक   (301 बार पढ़ा जा चुका है)

फूल.....


कितना दर्द सहते हो तुम फूल ,

कांटों मे भी मुस्कुराते हो तुम फूल ,

महक से दिलों में खुशी लाते तुम फूल ,

प्रक्रुति को अपने रंगों से,

किसी नई दुल्हन सी सजाते तुम फूल । ॥1॥



चाहे आए गर्मी जाड़ा या तूफ़ान कोई ,

न तुम लडखड़ाते हो ,

भौंरे तितली चुसे तुमको ,

फिर भी प्यार उन पर लुटाते हो ,

बन माला -गुलदस्ता प्यार तुम बाँटते हो ,

जीवन के हर दुख में खिले रहने का पाठ ,

बिन कहे हमें पढ़ा दिए जाते हो । ॥2॥

- सौम्य स्वरूप नायक

सम्बलपुर , ओडिशा

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रेणु
21 मार्च 2017

फूल सी कोमल रचना

बहुत बहुत धन्यवाद आपका

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21 मार्च 2017
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