2017-03-22

25 मार्च 2017   |  अमितेश मिश्र   (39 बार पढ़ा जा चुका है)

यादों का जो मौसम आया लगता बड़ा सुहाना है
सांझ- सवेरे मेरे घर में उनका आना जाना है
पहली बार मिले क्या उनसे,हम उनके ही हो बैठे-
जैसे लगता मेरा उनका रिश्ता बड़ा पुराना है
कवि:- पं दिनेश्वर नाथ मिश्र

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