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आई तुम्हारी याद -- कविता

28 मार्च 2017   |  रेणु

आई तुम्हारी याद -- कविता

दूभर तो बहुत थी -

ये उदासियाँ मगर ,

आई तुम्हारी याद -

तो हम मुस्कुरा दिए !

आई पलट के खुशियां -

महकी हैं मन की गलियां ;

बहुत दिनों के बाद -

हम मुस्कुरा दिए ! !

बड़े विकल कर रहे थे --

कुछ जो संशय मनचले थे ;

धीरज ना कुछ बचा था -

और नैन भर चले थे ;

बस यूँ ही उड़ चले --

कई दर्द अनकहे .

जब तुमसे हुई बात -

तो हम मुस्कुरा दिए ! !

हम यूँ ही बस भले थे -

तन्हाइयों में जीते !

आये किधर से राही -

तुम रंग ले के जिंदगी के ?

जीवन में वो कमी थी -

आँखों में बस नमी थी ,

पर तुम जो आये साथ --

तो हम मुस्कुरा दिए ! !





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