आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x

हिमालय - वंदन ----------- - कविता

01 अप्रैल 2017   |  रेणु

हिमालय -  वंदन   ----------- - कविता

सुना है हिमालय हो तुम !

सुदृढ़ , अटल और अविचल -

जीवन का विद्यालय हो तुम ! !

शिव के तुम्ही कैलाश हो -

माँ जगदम्बा का वास हो ,

निर्वाण हो महावीर का --

ऋषियों का चिर - प्रवास हो ;

ज्ञान - भक्ति से भरा -

बुद्ध का करुणालय हो तुम ! !

युगों से अजेय हो --

वीरों की विजय हो तुम ,

लालसा में शिखर की -

साहस का गन्तव्य हो तुम ;

संघर्ष का उत्कर्ष हो -

नीति का न्यायालय हो तुम ! !

कवियों का मधुर गान हो -

मुरली की मीठी तान हो ,

शीतल उच्छवास हो सृष्टि का -

राष्ट्र का अभिमान हो ;

नभ के संदेशे बांटता -

मेघों का पत्रालय हो तुम ! !

हिम - शिखरों से सजा --

माँ भारत का उन्नत भाल हो ,

टेढ़ी नजर से ताकते -

शत्रु का महाकाल हो ;

कण -कण में बसा भारत जिसमे -

कश्मीर से मेघालय हो तुम ! !

सुदृढ़ , अटल और अविचल -

जीवन का विद्यालय हो तुम ! !

सुना है हिमालय हो तुम -------- ! ! !





शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
प्रश्नोत्तर
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x