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स्वच्छता अभियान :नेपाल गुरु

02 अप्रैल 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट
 स्वच्छता अभियान :नेपाल गुरु

उत्तर प्रदेश में इस वक़्त ब्लॉक स्तर पर केंद्र सरकार के '' स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण'' के अन्तर्गत '' खुले में शौच मुक्त ''अभियान को लेकर कार्य जोरों पर है .उत्तर प्रदेश पंचायत राज विभाग के सचिव अमित कुमार गुप्ता के अनुसार '' प्रदेश के तीस जिले दिसंबर तक खुले में शौच मुक्त हो जायेंगे .'' . साथ ही मंडल के पंचायत राज उपनिदेशक अनिल कुमार सिंह ने बताया -'' कि प्रदेश में पहला शामली जिला है जो खुले में शौच मुक्त हो चुका है .जिले में ३२ हज़ार २०८ शौचालय बनाये गए हैं .''

अब अगर हम शामली जिले द्वारा इस मिशन के लिए की गयी मेहनत को दृष्टिगोचर करें तो हमें यहाँ के जिलाधिकारी श्री सुजीत कुमार ,सी.डी.ओ. यशु रस्तोगी और यहाँ के अन्य कर्मचारियों की मेहनत को भी ध्यान में रखना होगा जिसके बारे में हमें कैराना के प्रभारी ए.डी.ओ.पंचायत श्री धर्म सिंह जी ने विस्तार से बताया .उनके अनुसार -'' जिलाधिकारी के आदेशों के तहत सभी कर्मचारीगण सुबह को चार बजे खेतों में पहुँच जाते थे और लोगों को खुले में शौच के कारण आने वाली समस्याओं के सम्बन्ध में जागरूक करते थे साथ ही लोगों को समझाते थे कि इस तरह वे बीमारियों को तो बढ़ावा दे ही रहे हैं साथ ही अपराधों में भी सहयोग कर रहे हैं .इसके साथ ही साथ गांवों में लोगों की रूढ़िवादिता को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस सम्बन्ध में भी समझाया गया और उनकी आर्थिक परेशानी को मद्देनज़र रखते हुए शौचालयों के सम्बन्ध में अनुदान भी दिया गया और अन्य जरूरी जानकारी दे उनकी इस सम्बन्ध में मदद भी की गयी .''

ब्लॉक स्तर पर पूरे जिले में की गयी जिलाधिकारी व् सी.डी.ओ. की मेहनत रंग लाई है और शामली जिला खुले में शौच मुक्त होने जा रहा है किन्तु मात्र शामली जिला खुले में शौच मुक्त होने से इस प्रदेश या भारत देश का कल्याण होने वाला नहीं है क्योंकि जितना व्यय केंद्र सरकार इस योजना पर कर रही है वह बहुत ज्यादा है और परिणाम बहुत कम .साथ ही भारत का या कहें कि उत्तर प्रदेश का शामली जिला इतनी पुरानी सोच वाला भी नहीं है जितनी पुरानी सोच कहूँ या कहूँ कि पिछड़ा हुआ उत्तर प्रदेश या भारत का अन्य क्षेत्र है और उनके बारे में ये कहना या सोचना कि वे ३० दिसंबर तक खुले में शौच मुक्त हो जायेंगे ,असंभव नहीं तो कठिन अवश्य है .

भारत सरकार की ही तरह नेपाल सरकार ने भी खुले में शौच पर रोक लगाने हेतु कड़े कदम उठाये .नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों को सख्त हिदायत दी कि जो भी खुले में शौच के लिए जायेगा ,वह तमाम सरकारी सुविधाओं से वंचित हो जायेगा . एक जून २०१६ के अमर उजाला में प्रकाशित समाचार के अनुसार इसके लिए प्रत्येक परिवार को राशन कार्ड की तरह एक सफाई कार्ड दिया जा रहा है . यही कार्ड पात्रता की पहचान होगा .सफाई कार्ड के अभाव में व्यक्ति को न तो नेपाल सरकार से नागरिकता प्रमाण पत्र मिलेगा और न ही बिजली पानी का कनेक्शन ,पेंशन ,विवाह प्रमाण -पत्र अथवा अन्य कोई भी सुविधा।

अब जिस तरह भारत में खुले में शौच मुक्त किये जाने को लेकर प्रशासन को मेहनत करनी पड़ रही है और लोगों की नासमझी झेलनी पड़ रही है उसे देखते हुए इस मिशन की सफलता के लिए एक दशक की उम्मीद किया जाना भी कम नहीं कहा जा सकता है . .ऐसे में यहाँ जनहित को देखते हुए जबरदस्ती किया जाना भी गलत नहीं कहा जा सकता .तुलसीदास जी ने भी रामचरित मानस के सुन्दर कांड में कहा है -

''विनय न मानत जलधि जड़ ,गए तीन दिन बीत,

बोले राम सकोप तब भय बिन होये न प्रीत .''

काले धन पर शिकंजा कसने के लिए मोदी जी पहले ही ऐसा कदम उठा चुके हैं जिसे हमारे प्रभु श्री राम ने सागर को रास्ता देने के लिए उठाया तो ऐसे में अब इस कार्य की सफलता के लिए नेपाल का अनुसरण हमें करना ही होगा तब इस पुनीत कार्य में हम अति शीघ्र सफलता प्राप्त कर सकते हैं और फिर इस वक़्त देश में स्वच्छता अभियान ऐसे समर्पण भाव से चलाया जा रहा है कि चिकित्सक चिकित्सा छोड़ और पुलिस सुरक्षा व् अपराधों का सफाया छोड़ अपने कार्यस्थलों पर झाड़ू लगा रहे हैं जैसे सब स्थान पहले से गंदे व् अस्वच्छ थे तो फिर जो जगह सरकार भी अपने सफाई के कार्यस्थल में चुन रही है वहां सहयोग करना इनका परम कर्तव्य बनता ही है और जहाँ तक रही भारतीयों की नेचर अर्थात प्रकृति तो उनके सामने कलेक्टर की भी वह हैसियत नहीं जो कि एक सिपाही की है .ऐसे में अगर एक एक सिपाही भी खेत में उन्हें इस काम से रोकने के लिए खड़ा कर दिया जाये तो ब्लॉक के कर्मचारियों या जिले के अफसरों की वहां उपस्थिति की ज़रुरत नहीं पड़ेगी और सरकार अपना लक्ष्य सरलता से ही हासिल कर लेगी .वैसे भी हमें अपना लक्ष्य प्राप्त करना है तो जैसे भी हो करना चाहिए .कहा भी गया है -

''जहाँ काम आवे सुई ,कहा करे तलवार .''


शालिनी कौशिक

[कौशल ]

शालिनी कौशिक एडवोकेट

कहते हैं ये जीवन अनेकों रंगों से भरा है संसार में सभी की इच्छा होती है इन रंगों को अपने में समेट लेने की मेरी भी रही और मैंने बचपन से आज तक अपने जीवन में अनेकों रंगों का आवागमन देखा और उन्हें महसूस भी किया .सुख दुःख से भरे ये रंग मेरे जीवन में हमेशा ही बहुत महत्वपूर्ण रहे .एक अधिवक्ता बनी और केवल इसलिए कि अन्याय का सामना करूँ और दूसरों की भी मदद करूँ .आज समाज में एक बहस छिड़ी है नारी सशक्तिकरण की और मैं एक नारी हूँ और जानती हूँ कि नारी ने बहुत कुछ सहा है और वो सह भी सकती है क्योंकि उसे भगवान ने बनाया ही सहनशीलता की मूर्ति है किन्तु ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही सहनशील होती है मैं जानती हूँ कि बहुत से पुरुष भी सहनशील होते हैं और वे भी बहुत से नारी अत्याचार सहते हैं इसलिए मैं न नारीवादी हूँ और न पुरुषवादी क्योंकि मैंने देखा है कि जहाँ जिसका दांव लग जाता है वह दूसरे को दबा डालता है.

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