आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x

बातें कुछ अनकही सी...........: अंतर्द्वन्द

17 अप्रैल 2017   |  युगेश कुमार

बातें कुछ अनकही सी...........: अंतर्द्वन्द

अंतर्द्वन्द जो सीने में बसा

औचित्य जीवन का मैं सोचता

यहाँ हर कोई मुझे पहचानता है

मैं पर खुद में खुद को ढूंढता


साँस चलती हर घड़ी
प्रश्न उतने ही फूटते
जो सपने बनते हैं फलक पर
धरा पर आकर टूटते


कुंठित होकर मन मेरा

मुझसे है आकर पूछता

जिसने देखे सपने वो कौन था

और कौन तू है ये बता


रो-रो कर मुझसे बोलती है
मानव की ये त्रासदी
वो बनना चाहता है कुछ
और बन निकलता और कोई


कौतुहल विचारों में
एक शैलाब जिसे मैं रोकता
जो हारता न किसी और से है
वो बस स्वयँ से हारता


मझधार में कस्ती हमारी
एक सवाल हमसे पूछती
इस ठौर चलूँ उस ठौर चलूँ
मन को हमारे टटोलती


विचार कर जो एक तो
आज या कल मंज़िल को मैं पाउँगा
वरना यही मझधार है,कस्ती यही है
शायद अनचाही मंज़िल यही
कल मैं औरों को,खुद को
बस कोसता ही जाऊँगा/

बातें कुछ अनकही सी...........: अंतर्द्वन्द

http://yugeshkumar05.blogspot.com/2017/04/blog-post.html

बातें कुछ अनकही सी...........: अंतर्द्वन्द

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
प्रश्नोत्तर
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x