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गीता ज्ञान

19 अप्रैल 2017   |  pradeep

जो पुरुष सब प्राणियों में मुझ वासुदेव को ही व्याप्त देखता है और सम्पूर्ण जगत को मुझ वासुदेव के अन्तर्गत देखता है, उसके लिए मै अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिए अदृश्य नहीं होता. (6-30)

He who sees me everywhere and sees everything in me, will not be lost to me, and I will not be lost to him.

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