बेटी की माँ

21 अप्रैल 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (192 बार पढ़ा जा चुका है)

  बेटी की          माँ

बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग जितने भी लोग बेटी के जन्म पर उपस्थित होते हैं सभी के चेहरे पर मुर्दनी सी ही छा जाती है.सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि बेटी का जन्म सुनकर उसे जन्म देने वाली माँ भी ख़ुशी के पल से दूर नज़र आती है और मर्दों के इस समाज द्वारा यह ठीकरा माता उर्फ़ नारी के सिर पर ही फोड़ दिया जाता है कि माँ स्वयं नारी होकर भी बेटी अर्थात नारी का जन्म नहीं चाहती इसी से यह साबित होता है कि नारी ही नारी की सबसे बड़ी दुश्मन है

अब नारी नारी की दुश्मन कैसे है यह मुद्दा तो बहुत लम्बे विचार-विमर्श का है किन्तु माँ स्वयं नारी होकर बेटी अर्थात नारी का जन्म क्यों नहीं चाहती यह मुद्दा अभी की ही एक घटना प्रत्यक्ष रूप में साबित करने हेतु पर्याप्त है -

[शर्मनाक: बेटी पैदा हुई तो पत्नी को निर्वस्त्र कर छत पर घुमाया-अमर उजाला से साभार ]

एक तरफ केंद्र सरकार देश में बेटी बचाओ अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ एक मां के लिए बेटी पैदा करना अभिशाप बन गया। इसके लिए वह पिछले चार साल से पति की प्रताड़ना सह रही है। हद तब हो गई जब पति ने महिला को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। यही नहीं, महिला को पति ने छत पर धूप में निर्वस्त्र घूमाया। इससे महिला बेहोश हो गई। होश में आने पर किसी तरह से उसने अपनी बहन को फोन किया और आपबीती बताई। इसके बाद महिला की बहन लक्ष्मी ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि महिला सेल में भी शिकायत दर्ज नहीं की गई। सुनवाई नहीं होने पर महिला की बहन ने एसएसपी से शिकायत की। इसके बाद बाड़ी ब्राह्मणा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। [पति की प्रताड़ना से उसके दो बच्चों की मौत हो चुकी--महिला को उपचार के लिए मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल सुमन कुमारी बिश्नाह के पल्ली मोड़ की रहने वाली है। उसने बताया कि उसका पति राकेश कई सालों से मारपीट रहा है। उनकी चार साल की बेटी है। इसके लिए ही उसे पिछले चार साल से प्रताडि़त किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से पति का अत्याचार बढ़ गया। उसके सिर पर पत्थर से मारा और लहूलुहान कर दिया। पति जुआ खेल ता है और शराब पीकर तंग करता है। उसने बैंक का कर्ज चुकाने के लिए मारना शुरू कर दिया है। महिला की बहन लक्ष्मी ने बताया कि वह शिकायत लेकर बाड़ी ब्राह्मणा पुलिस स्टेशन और महिला सेल जम्मू में गई थी, लेकिन कहीं पर मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद एसएसपी से गुहार लगाने पहुंची, तब जाकर मामला दर्ज किया गया। घायल महिला ने यह भी बताया कि पति की प्रताड़ना से उसके दो बच्चों की मौत हो चुकी है। अब वह दूसरी बच्ची को भी मारना चाहता है। एसएचओ बाड़ी ब्राह्मणा भरत शर्मा का कहना है कि आरोपी पति के खिलाफ 498 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी अभी गिरफ्त से बाहर है।] बेटी का जन्म और इस तरह के अत्याचार माँ अपने पर तो सहकर भी बर्दाश्त कर सकती है किन्तु वह जानती है कि यह अत्याचार मात्र यहीं तक रुकने वाला नहीं है इसका सामना उसकी बेटी को पहले अपने पिता के घर में और फिर अपनी ससुराल में उसी की तरह करना पड़ेगा इसलिए वह नहीं चाहती कि उसकी कोख से कोई भी बेटी जन्म ले और उसी की तरह दुःख सहे.अब यह निश्चित करना हम सभी का काम है कि क्या वास्तव में माँ अपनी बेटी की उसी तरह दुश्मन है जैसे नारी नारी की या फिर उसे इस पुरुष सत्तात्मक समाज ने ऐसा बनने को मजबूर कर दिया है ?


शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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शालिनी कौशिक एडवोकेट

कहते हैं ये जीवन अनेकों रंगों से भरा है संसार में सभी की इच्छा होती है इन रंगों को अपने में समेट लेने की मेरी भी रही और मैंने बचपन से आज तक अपने जीवन में अनेकों रंगों का आवागमन देखा और उन्हें महसूस भी किया .सुख दुःख से भरे ये रंग मेरे जीवन में हमेशा ही बहुत महत्वपूर्ण रहे .एक अधिवक्ता बनी और केवल इसलिए कि अन्याय का सामना करूँ और दूसरों की भी मदद करूँ .आज समाज में एक बहस छिड़ी है नारी सशक्तिकरण की और मैं एक नारी हूँ और जानती हूँ कि नारी ने बहुत कुछ सहा है और वो सह भी सकती है क्योंकि उसे भगवान ने बनाया ही सहनशीलता की मूर्ति है किन्तु ऐसा नहीं है कि केवल नारी ही सहनशील होती है मैं जानती हूँ कि बहुत से पुरुष भी सहनशील होते हैं और वे भी बहुत से नारी अत्याचार सहते हैं इसलिए मैं न नारीवादी हूँ और न पुरुषवादी क्योंकि मैंने देखा है कि जहाँ जिसका दांव लग जाता है वह दूसरे को दबा डालता है.

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