आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x

तैयार रहता हूँ

21 अप्रैल 2017   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)

चाँदनी रात में सब साथ होते हैं

अंधेरे में मगर, परछाईं भी साथ छोड़ देती है

इसलिए तनहा जीने को तैयार रहता हूँ

कहने को हमसफ़र हैं कई

कौन किस मोड़ पर मगर, साथ छोड़ दे

इसलिए सफ़र ज़िंदगी का

अकेले ही काटने को तैयार रहता हूँ

दिलों जान से चाहने वाला दिलबर भी है

ना जाने मगर, किस बात पर दिल तोड़ दे

इसलिए, दिल के टुकड़े, बँटोरने को

तैयार रहता हूँ



१७ अप्रेल २०१७

जिनेवा


शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
लोकप्रिय प्रश्न