डरते थे

24 अप्रैल 2017   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)   (89 बार पढ़ा जा चुका है)

रहते थे साथ साये की तरह

साथ चलने से मगर, डरते थे

क़रीब रहना चाहते थे

नज़दीक आने से मगर, डरते थे

आँखों में बसे थे तुम

निगाह मिलाने से मगर, डरते थे

हँसी तुम्हारी अनमोल थी

साथ मुस्कुराने से मगर, डरते थे

तीन लफ़्ज़ कहने थे तुम से

ज़ुबान पर लाने से मगर, डरते थे

दिल तो तुम्हें दे दिया था

दिल लगाने से मगर, डरते थे


२२ अप्रेल २०१७

जिनेवा


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