पर्चा

14 मई 2017   |  Suneel Goyal   (101 बार पढ़ा जा चुका है)

घंटी बजते ही जा बैठे सब

अपनी - अपनी जगह पर

कोई पेन्सिल छील रहा है

तो कोई शर्ट की बाँह में

कुछ छुपाने की कोशिश

में लगा हुआ है

ना जाने कब मास्टर जी ले आए पर्चा

और थमा दिया कपकपाते हाथों में

डरते डरते देखा तो पता चला

जो पड़ा था वो तो आया ही नहीं.

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रेणु
29 अगस्त 2017

सबकी जिन्दगी में ये दुविधा भरा लेकिन प्यारा सा पल आता जरुर है ------

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