तेरे मेरे सपने

16 मई 2017   |  ज़िआउल हुसैन   (96 बार पढ़ा जा चुका है)

  • रहे जुदा हो गई अब अजनबी हो जायेंगे ..

  • तेरे मेरे सपने सनम अब तू ही बता कहा जायेंगे ...!!

  • राह में कोई नहीं तेरे यादो के सिवा हमसफ़र ...

  • तेरी याद अब ना आई तो शायद हम मर जाएंगे ...!!!

  • दिवार ही दिवार खड़े है मेरे रहे मंजिल में ...

  • तू ही बता अब तनहा हम किस किस से टकराएंगे ...!!!!


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रेणु
17 मई 2017

बहुत बढ़िया रचना है हुसैन जी -- मुझे अच्छी लगी -----

शुक्रया रेणु जी

बहुत खूब वाह वाह

स्वागतम

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