भूल जाएंगे

17 मई 2017   |  ज़िआउल हुसैन   (115 बार पढ़ा जा चुका है)

संभालना हमको आता है हम संभल भी जायेंगे

यादो की फूल बनकर तेरे साखो पर मुस्कराएंगे



बिछड़ जाने से मुहब्बत की दस्ता ख़तम नहीं होती


हम याद थे हम याद है तुझे हम याद आएंगे



सलामत रहे तू अपनी दुनिया में मसरूफ रहे


किस्तों में करके हम भी तुझे अब भूल जाएंगे



शायर ज़िआउल हुसैन ज़िआ

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रेणु
18 मई 2017

हुसैन जी बहुत भावपूर्ण रचना बन पड़ी है आपकी -- शुभकामना -------------

वाह क्या खूब कहा किस्तों में तुझे हम भूल जाएंगे

धन्यवाद शर्मा

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