बीती बातो में क्या रखा है

17 मई 2017   |  ज़िआउल हुसैन   (96 बार पढ़ा जा चुका है)

आखिर बीती बातो में क्या रखा है...

वक़्त ने गहरे ज़ख्मो को छुपा रखा है ...!!



कही अश्को की तहरीरे कही दुँधली सी तस्वीरें ...

कही एक बून्द ने सागर को छुपा रखा है ....!!



दिल में ऐसे भी अँधेरे ना हो मेरे रब्बा ...

जिन अंधेरो ने कई सूरज को छुपा रखा है ...!!


चलो आगे चलते है नए सूरज की तरफ ...

भूल जाओ गुज़रा कल उनमे क्या रखा है. ..!!!

अगला लेख: प्रेरणा



रेणु
18 मई 2017

भूल जाओ कल के वो दर्द भरे अफ़साने ----- आज मुस्कुरा दो संग साथी के जिसके हैं कई बहाने - -- हुसैन जी आशा और विश्वास से भरी सुंदर रचना

धन्यबाद

भूल जाओ गुजरा कल,,,, वहुत बढ़िया

धन्यवाद

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