तुम ही सब्रों क़रार मेरा

18 मई 2017   |  Karan Singh Sagar ( डा. करन सिंह सागर)   (94 बार पढ़ा जा चुका है)

तुम ही हो मंज़िल मेरी

तुम ही हो सब्रों क़रार मेरा

प्यार तुम्हारा है, अब जीने का सहारा

दिलों जान मेरा, हो गया है तुम्हारा

आए हो जब से ज़िंदगी में मेरी

मिल गया मुस्कुराने का बहाना

ख़ुशी की मेरी, तुम वज़ह बन गए हो

रातों का चैन, दिन का सुकून बन गए हो

कट जाएगी ज़िंदगी, प्यार में तुम्हारे

तुम इस क़दर, मेरी रूह का अंश बन गए हो

तुम ही हो मेरी मंज़िल

तुम ही सब्रों क़रार मेरा


९ मई २०१७

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