नेह भरी पाती

21 मई 2017   |  डॉ हरेश्वर रॉय   (71 बार पढ़ा जा चुका है)

नेह भरी पाती

  • नेह भरी

पाती

अब नहीं आती.


गुप्तवास में

माँ की लोरी

गूंगी बहरी

चैती होरी

सुखिया दादी

पराती

अब नहीं गाती


अंगनाई की

फट गई छाती

चूल्हे चौकों की

बँट गई माटी


पूर्वजों की

थाती

अब नहीं भाती.

-- डॉ. हरेश्वर राय

अगला लेख: चलो गांव



रेणु
21 मई 2017

मन भिगोने वाली -- भावपूर्ण रचना -- हरेश्वर जी आपकी रचना बहुत अच्छी लगी --

चूल्हे चौकों की बंट गई माटी,,,बहुत ही संवेदनापूर्ण भाव।

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 मई 2017
चलो गांवजरा सा घूम आएं .पत्थरों के शहर मेंबेजान बन गया हूँउबली हुई चाय कीसिट्ठी सा छन गया हूँबरसों गुजर गएफफूंद आये.आगबबूली दोपहरी मेंतन तवा सा जल रहानोनी लगी दीवारों मेंमन कंदील सा गल रहाचलो नीम की छांवजरा स
21 मई 2017
21 मई 2017
सूनी डगरेंप्यासे खेतपियराये से गीतफ़ुर्र हुईगौरैया चिरईंभूख न जाने रीत.बेटा बाम्बेदिल्ली बिटियाअपने संगचितकबरी बछिया चलनी छानीदरकी भीत. बिरहा
21 मई 2017
24 मई 2017
जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम
24 मई 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x