माँ भारती

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (105 बार पढ़ा जा चुका है)

जिसकी मिट्टी में ममता है,

आँचल प्यार का साया है !

प्रेम प्यार से सनी हुई,

जिसकी अद्भुत छाया है !!


यहीं आके हमको चैन मिले ,

यह कैसी तेरी माया है !

हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !!


हर पल हर छन तूने,

हमारा साथ निभाया है !

हम धन्य हुए तूने ,

हमको सीने से लगाया है !!


सूरज ने हर सुबह तुझे,

आकर शीश झुकाया है !

पर्वत हिमालय ने तुझे,

अद्भुत ताज पहनाया है !!


तेरी ही पवित्र सुगंध ने,

हर फूल को महकाया है !

अम्बर ने तेरे आँगन को,

सितारों से सजाया है !!


तेरा गुणगान तेरी महिमा को,

ऋषियों ने भी गया है !

तेरे ही तत्वो से बनी,

हमारी ये काया है !!


ममतामयी वरदायानी,

तेरी अद्भुत छाया है !

तेरी संतान होने का माँ,

गौरव हमने पाया है !!


- कुँवर दीपक रावत ©

अगला लेख: वीर जवान



बहुत बढ़िया

धन्यवाद

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 मई 2017
एक छोटा सा प्रयास आप सभी दोस्तों के लिये, आशा करता हूँ आपको पसंद आएगाकुँवर दीपक रावत
25 मई 2017
21 मई 2017
तेरी तक़दीर का दोष नहींहै मेरी क़िस्मत का क़सूर तेरी तक़दीर में तो हम शामिल थेहमारी क़िस्मत में मगर तेरा साथ ना था तेरे नसीब ने तो मिलाया था हमें हमारे मुक़द्दर ने ही तुझ से बिछड़ने पर मजबूर कर किया ना तेरा ज़ोर चला अपने भाग्य पर ना मैं अपनी नियति बदल पाया अब तो इसी उम्मीद पर ज़िंदा हूँकी कभी तो जोड
21 मई 2017
24 मई 2017
वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के, वो पल कहाँ राहत के !अब इंतेज़ार है और ख़्वाहिश है, वो निशान कहाँ हसरत के !!कभी सबको साथ लेकर चलने की आदत थी दोस्तो !अब ख़बर नहीं कहाँ है, वो फसाने लड़कपन के !!कभी चाहत पे दुनिया का हर
24 मई 2017
15 मई 2017
तु
कभी बनारस की सुबह बन जाती हो। तो भोपाल की शाम हो जाती हो। तुम रास्तें के दृश्य हो या, दोनों पर एक आसमां। तुम चेतन की किताब का किरदार तो नहीं हो, तुम जो हो हमेशा हो। चार कोनो में नहीं होती तुम, तुमने ही तुम्हें रचा हैं। अब प्रेम का क्या वर्णन करूँ, मेरा प्रेम तो तुम्ह
15 मई 2017
21 मई 2017
नेह भरीपाती अब नहीं आती. गुप्तवास में माँ की लोरीगूंगी बहरी चैती होरी सुखिया दादी परातीअब नहीं गाती अंगनाई की फट गई छातीचूल्हे चौकों कीबँट गई माटीपूर्वजों कीथाती अब
21 मई 2017
24 मई 2017
अश्क तो हैं तेरी यादों के, मेरे लिए काफ़ी हैं !कुछ गुज़रे दिन इनके सहारे, गुजर जाएँगे जो बाकी हैं !!तेरी तस्वीर थी जो आँखों में, इसमे अब पानी का रंग शामिल है !ये धुंधली सी हो गयी है, बस अब थोडा सा रंग बाकी है !!म
24 मई 2017
24 मई 2017
वो क़लम नहीं हो सकती है जो बिकती हो बाज़ारों में ! क़लम वही है जिसकी स्याही, ना फीकी पड़े नादिया की धारों में !! क़लम वो है जो बनती है, संघर्ष के तूफान से ! लिखती है तो बस सिर्फ़ मानवता क़ी ज़ुबान से !! क़लम चाकू नहीं खंज़र नहीं, क़लम तलवार है ! सत्यमेव ज्यते ही इस
24 मई 2017
29 मई 2017
जरा देखो कहीं कोई फसाद,हुआ हो तो वहाँ जाया जाये । नहीं हुआ हो तो जाकर कराया जाये । राजनीति में निठल्लापन ठीक नहीं । कहीं आग लगा के बुझाया जाये ।
29 मई 2017
24 मई 2017
जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम
24 मई 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x