माँ भारती

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (87 बार पढ़ा जा चुका है)

जिसकी मिट्टी में ममता है,

आँचल प्यार का साया है !

प्रेम प्यार से सनी हुई,

जिसकी अद्भुत छाया है !!


यहीं आके हमको चैन मिले ,

यह कैसी तेरी माया है !

हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !!


हर पल हर छन तूने,

हमारा साथ निभाया है !

हम धन्य हुए तूने ,

हमको सीने से लगाया है !!


सूरज ने हर सुबह तुझे,

आकर शीश झुकाया है !

पर्वत हिमालय ने तुझे,

अद्भुत ताज पहनाया है !!


तेरी ही पवित्र सुगंध ने,

हर फूल को महकाया है !

अम्बर ने तेरे आँगन को,

सितारों से सजाया है !!


तेरा गुणगान तेरी महिमा को,

ऋषियों ने भी गया है !

तेरे ही तत्वो से बनी,

हमारी ये काया है !!


ममतामयी वरदायानी,

तेरी अद्भुत छाया है !

तेरी संतान होने का माँ,

गौरव हमने पाया है !!


- कुँवर दीपक रावत ©

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बहुत बढ़िया

धन्यवाद

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