अंदाज़ शायराना

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (113 बार पढ़ा जा चुका है)

कहते हैं कुछ लोग की,

ये अंदाज़ शायराना है !

कहते हैं हम की,

अब ठीक से पहचाना है !!


दिल की तन्हाई का,

अब तो ये ही अफ़साना है !

कहते हो फिर क्यूँ के,

ये तो बस बहाना है !!


फिर वही दिन, वही रोशनी,

वही आसमा है !

जाने क्यूँ फिर भी यहाँ,

कुछ तो विराना है !!


वो मोहब्बत कहाँ की,

तबीयत जिससे हसीन हो !

अभी तो तुमको भी हमने,

चार दिन से जाना है !!


जिंदगी तुम कभी,

फुरसत में मिलना मुझसे !

अभी तो हर लम्हा मुझे

, कोई फ़र्ज़ निभाना है !!


दोस्ती तेरे बस का रोग नहीं,

ए दिले दीपक नादान !

कहते है सब के भलाई का

अब कहाँ जमाना है !!


कुँवर दीपक रावत

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बहुत अच्छी पंक्तियां।

धन्यवाद

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