बदनाम

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (132 बार पढ़ा जा चुका है)

कुछ खत मेरे नाम, बेनाम चले आए

हम आज तेरी महफ़िल से, गुमनाम चले आए

कुछ वक़्त तेरे साथ, कुछ लम्हे तेरे नाम
तेरी दोस्ती की गफलत में, हर शाम चले आए

नाचीज़ समझते हो, बड़े शौक से समझो
फिर भी मेरे नाम, कुछ इल्ज़ाम चले आए

कुछ समझ गये हम, कुछ समझा गये हम
कुछ ना कह के भी, बदनाम चले आए


Kuch Khat Mere Naam – Kunwar Deepak Rawat (कुँवर दीपक रावत)

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रेणु
24 मई 2017

बहुत बढ़िया पंक्तियाँ

हृदय से आभार रेणु जी

धन्यवाद

फिर भी मेरे नाम , कुछ इलज़ाम चले आये ।
बहुत खूब

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