बदनाम

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (128 बार पढ़ा जा चुका है)

कुछ खत मेरे नाम, बेनाम चले आए

हम आज तेरी महफ़िल से, गुमनाम चले आए

कुछ वक़्त तेरे साथ, कुछ लम्हे तेरे नाम
तेरी दोस्ती की गफलत में, हर शाम चले आए

नाचीज़ समझते हो, बड़े शौक से समझो
फिर भी मेरे नाम, कुछ इल्ज़ाम चले आए

कुछ समझ गये हम, कुछ समझा गये हम
कुछ ना कह के भी, बदनाम चले आए


Kuch Khat Mere Naam – Kunwar Deepak Rawat (कुँवर दीपक रावत)

अगला लेख: माँ भारती



रेणु
24 मई 2017

बहुत बढ़िया पंक्तियाँ

हृदय से आभार रेणु जी

धन्यवाद

फिर भी मेरे नाम , कुछ इलज़ाम चले आये ।
बहुत खूब

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 मई 2017
नेह भरीपाती अब नहीं आती. गुप्तवास में माँ की लोरीगूंगी बहरी चैती होरी सुखिया दादी परातीअब नहीं गाती अंगनाई की फट गई छातीचूल्हे चौकों कीबँट गई माटीपूर्वजों कीथाती अब
21 मई 2017
24 मई 2017
जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम
24 मई 2017
15 मई 2017
तु
कभी बनारस की सुबह बन जाती हो। तो भोपाल की शाम हो जाती हो। तुम रास्तें के दृश्य हो या, दोनों पर एक आसमां। तुम चेतन की किताब का किरदार तो नहीं हो, तुम जो हो हमेशा हो। चार कोनो में नहीं होती तुम, तुमने ही तुम्हें रचा हैं। अब प्रेम का क्या वर्णन करूँ, मेरा प्रेम तो तुम्ह
15 मई 2017
24 मई 2017
मिट गयीं वो हस्तियाँ,और उनकी बस्तियाजो मिटाने के लिए, हमे आई हैंथम गयीं वो आँधियाँ,बुझ गयीं वो बातियाजो जलाने के लिए, हमे आई हैंकट गये वो कर,झुक गये वो सरजो झुकने के लिए, हमे आए हैं– कुँवर दीपक रावत
24 मई 2017
24 मई 2017
जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम
24 मई 2017
25 मई 2017
एक छोटा सा प्रयास आप सभी दोस्तों के लिये, आशा करता हूँ आपको पसंद आएगाकुँवर दीपक रावत
25 मई 2017
24 मई 2017
मूक क़लम को साधकरभावनाए बाँधकरहोठों पे गुनगुनाते हुयेआधे अधूरे से गीतों कोरात के अँधेरे मेंदीपक के प्रकाश सेवह लिख रहा होगावह लिख रहा होगा- कुँवर दीपक रावत
24 मई 2017
24 मई 2017
जिसकी मिट्टी में ममता है, आँचल प्यार का साया है ! प्रेम प्यार से सनी हुई, जिसकी अद्भुत छाया है !! यहीं आके हमको चैन मिले , यह कैसी तेरी माया है ! हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !! हर पल हर छन तूने, हमारा साथ निभाया है ! हम धन्य हुए तूने , हमको सीने से लगाया
24 मई 2017
25 मई 2017
हर चीज़ की कीमत तय कर दी, उन लम्हों की कीमत क्या होगी !जो साथ हँसे, जो साथ जिए, उन रिश्तों की कीमत क्या होगी !!क्यूँ भूल गये उस बचपन को, उन नन्ही आँखो के सपनो को !वो कैसे तुम अब पाओगे, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !क्यूँ भूल गये उन कसमो को, उन छोटी छोटी सी रस्मो को !वो कैसे तु
25 मई 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x