साधक

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (91 बार पढ़ा जा चुका है)

मूक क़लम को साधकर

भावनाए बाँधकर

होठों पे गुनगुनाते हुये

आधे अधूरे से गीतों को

रात के अँधेरे में

दीपक के प्रकाश से

वह लिख रहा होगा

वह लिख रहा होगा


- कुँवर दीपक रावत

अगला लेख: माँ भारती



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 जून 2017
वो
वो मुस्कुरा रहे हैं पर, आँखें कुछ और ही बयान कर रही हैं दुनिया के लिए खुश है, पर दुखों का सागर दिल में छुपा रखा है पूँछा जब उनसे इसका सबब,तो बोले इसको छुपा ही रहने दीजिए हुमने कहा उनसे, माना की सब आपकी निगाहो, पढ़ नहीं सकतेपर जो समझते हैं दिल का हालउनके सामने इन निगाहों को भी मुस्कुराना सिखा
03 जून 2017
24 मई 2017
कुछ खत मेरे नाम, बेनाम चले आएहम आज तेरी महफ़िल से, गुमनाम चले आएकुछ वक़्त तेरे साथ, कुछ लम्हे तेरे नामतेरी दोस्ती की गफलत में, हर शाम चले आएनाचीज़ समझते हो, बड़े शौक से समझोफिर भी मेरे नाम, कुछ इल्ज़ाम चले आए
24 मई 2017
24 मई 2017
जिसकी मिट्टी में ममता है, आँचल प्यार का साया है ! प्रेम प्यार से सनी हुई, जिसकी अद्भुत छाया है !! यहीं आके हमको चैन मिले , यह कैसी तेरी माया है ! हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !! हर पल हर छन तूने, हमारा साथ निभाया है ! हम धन्य हुए तूने , हमको सीने से लगाया
24 मई 2017
29 मई 2017
जरा देखो कहीं कोई फसाद,हुआ हो तो वहाँ जाया जाये । नहीं हुआ हो तो जाकर कराया जाये । राजनीति में निठल्लापन ठीक नहीं । कहीं आग लगा के बुझाया जाये ।
29 मई 2017
21 मई 2017
तेरी तक़दीर का दोष नहींहै मेरी क़िस्मत का क़सूर तेरी तक़दीर में तो हम शामिल थेहमारी क़िस्मत में मगर तेरा साथ ना था तेरे नसीब ने तो मिलाया था हमें हमारे मुक़द्दर ने ही तुझ से बिछड़ने पर मजबूर कर किया ना तेरा ज़ोर चला अपने भाग्य पर ना मैं अपनी नियति बदल पाया अब तो इसी उम्मीद पर ज़िंदा हूँकी कभी तो जोड
21 मई 2017
24 मई 2017
ऐ वीर जवान तू तो है तूफान तूने चाहा जहाँ पहुँच पाया वहाँ तू चला जहाँ तेरा कारवाँ तूफ़ानो में बढता गया रुका नहीं कभी तू गया जहाँ पहाड़ो पे भी चड़ता गया जब हवा चली ढक गये वो निशान जो बने थे वहाँ मिट गये वो निशान ऐ वीर जवान पैरो के निशान मिलते ही नहीं ढूंडू मैं क
24 मई 2017
24 मई 2017
जिसकी मिट्टी में ममता है, आँचल प्यार का साया है ! प्रेम प्यार से सनी हुई, जिसकी अद्भुत छाया है !! यहीं आके हमको चैन मिले , यह कैसी तेरी माया है ! हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !! हर पल हर छन तूने, हमारा साथ निभाया है ! हम धन्य हुए तूने , हमको सीने से लगाया
24 मई 2017
24 मई 2017
वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के, वो पल कहाँ राहत के !अब इंतेज़ार है और ख़्वाहिश है, वो निशान कहाँ हसरत के !!कभी सबको साथ लेकर चलने की आदत थी दोस्तो !अब ख़बर नहीं कहाँ है, वो फसाने लड़कपन के !!कभी चाहत पे दुनिया का हर
24 मई 2017
15 मई 2017
तु
कभी बनारस की सुबह बन जाती हो। तो भोपाल की शाम हो जाती हो। तुम रास्तें के दृश्य हो या, दोनों पर एक आसमां। तुम चेतन की किताब का किरदार तो नहीं हो, तुम जो हो हमेशा हो। चार कोनो में नहीं होती तुम, तुमने ही तुम्हें रचा हैं। अब प्रेम का क्या वर्णन करूँ, मेरा प्रेम तो तुम्ह
15 मई 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x