साधक

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (89 बार पढ़ा जा चुका है)

मूक क़लम को साधकर

भावनाए बाँधकर

होठों पे गुनगुनाते हुये

आधे अधूरे से गीतों को

रात के अँधेरे में

दीपक के प्रकाश से

वह लिख रहा होगा

वह लिख रहा होगा


- कुँवर दीपक रावत

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