वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (180 बार पढ़ा जा चुका है)

 वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के

वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के, वो पल कहाँ राहत के !

अब इंतेज़ार है और ख़्वाहिश है, वो निशान कहाँ हसरत के !!

कभी सबको साथ लेकर चलने की आदत थी दोस्तो !
अब ख़बर नहीं कहाँ है, वो फसाने लड़कपन के !!

कभी चाहत पे दुनिया का हर जर्रा जर्रा कायम था !
मुद्दत हुई खोजते, वो गुलिस्ताँ कहाँ चाहत के !!

कभी दुश्मन भी हमारा, दोस्ती को तरसता था !
अब अपना भी नहीं कोई, वो अफ़साने कहाँ किस्मत के !!

नज़र फेर लेना बेशक दीपक से तुम गम नहीं !
अपनेपन का कायल है, उसकी कुदरत को समझ के !!

अगला लेख: वीर जवान



वाह वाह क्या बात है

हार्दिक आभार शर्मा जी

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 जून 2017
वो
वो मुस्कुरा रहे हैं पर, आँखें कुछ और ही बयान कर रही हैं दुनिया के लिए खुश है, पर दुखों का सागर दिल में छुपा रखा है पूँछा जब उनसे इसका सबब,तो बोले इसको छुपा ही रहने दीजिए हुमने कहा उनसे, माना की सब आपकी निगाहो, पढ़ नहीं सकतेपर जो समझते हैं दिल का हालउनके सामने इन निगाहों को भी मुस्कुराना सिखा
03 जून 2017
24 मई 2017
कुछ खत मेरे नाम, बेनाम चले आएहम आज तेरी महफ़िल से, गुमनाम चले आएकुछ वक़्त तेरे साथ, कुछ लम्हे तेरे नामतेरी दोस्ती की गफलत में, हर शाम चले आएनाचीज़ समझते हो, बड़े शौक से समझोफिर भी मेरे नाम, कुछ इल्ज़ाम चले आए
24 मई 2017
25 मई 2017
हर चीज़ की कीमत तय कर दी, उन लम्हों की कीमत क्या होगी !जो साथ हँसे, जो साथ जिए, उन रिश्तों की कीमत क्या होगी !!क्यूँ भूल गये उस बचपन को, उन नन्ही आँखो के सपनो को !वो कैसे तुम अब पाओगे, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !क्यूँ भूल गये उन कसमो को, उन छोटी छोटी सी रस्मो को !वो कैसे तु
25 मई 2017
29 मई 2017
जरा देखो कहीं कोई फसाद,हुआ हो तो वहाँ जाया जाये । नहीं हुआ हो तो जाकर कराया जाये । राजनीति में निठल्लापन ठीक नहीं । कहीं आग लगा के बुझाया जाये ।
29 मई 2017
25 मई 2017
"मोहल्ले के लौंडों का प्यार अक्सर इंजीनियर डॉक्टर उठा कर ले जाते हैं।"रांझना फिल्म का ये डॉयलोग तो आपके जेहन में होगा ही।practical life में यानी की असल जिन्दगी में प्यार काफी हद तक ऐसा ही होता है।अब हर लव स्टोरी तो srk की फिल्मों की तरह होती नहीं कि पलट बोला और लड़की पलट ग
25 मई 2017
24 मई 2017
मिट गयीं वो हस्तियाँ,और उनकी बस्तियाजो मिटाने के लिए, हमे आई हैंथम गयीं वो आँधियाँ,बुझ गयीं वो बातियाजो जलाने के लिए, हमे आई हैंकट गये वो कर,झुक गये वो सरजो झुकने के लिए, हमे आए हैं– कुँवर दीपक रावत
24 मई 2017
24 मई 2017
अश्क तो हैं तेरी यादों के, मेरे लिए काफ़ी हैं !कुछ गुज़रे दिन इनके सहारे, गुजर जाएँगे जो बाकी हैं !!तेरी तस्वीर थी जो आँखों में, इसमे अब पानी का रंग शामिल है !ये धुंधली सी हो गयी है, बस अब थोडा सा रंग बाकी है !!म
24 मई 2017
24 मई 2017
जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम
24 मई 2017
31 मई 2017
मु
मुफ़लिसी में सब ने दामन छोड़ दिया दोस्त नज़रें चुरा कर निकल जाते हैं अपने भी अजनबी लगते हैं रिश्तों में दूरियाँ आ गयी है फिर दिल को समझता हूँ किसी से क्यों गिला करता है तेरी ख़ुद की परछाईं तेरा साथ छोड़ देती है रात के अंधेरे में तो इस जहान से क्यों उम्मीद रखता हैतेरा साथ देने की
31 मई 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x