वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के

24 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (172 बार पढ़ा जा चुका है)

 वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के

वो लम्हे कहाँ फ़ुरसत के, वो पल कहाँ राहत के !

अब इंतेज़ार है और ख़्वाहिश है, वो निशान कहाँ हसरत के !!

कभी सबको साथ लेकर चलने की आदत थी दोस्तो !
अब ख़बर नहीं कहाँ है, वो फसाने लड़कपन के !!

कभी चाहत पे दुनिया का हर जर्रा जर्रा कायम था !
मुद्दत हुई खोजते, वो गुलिस्ताँ कहाँ चाहत के !!

कभी दुश्मन भी हमारा, दोस्ती को तरसता था !
अब अपना भी नहीं कोई, वो अफ़साने कहाँ किस्मत के !!

नज़र फेर लेना बेशक दीपक से तुम गम नहीं !
अपनेपन का कायल है, उसकी कुदरत को समझ के !!

अगला लेख: वीर जवान



वाह वाह क्या बात है

हार्दिक आभार शर्मा जी

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
24 मई 2017
जलते हुए शोलों से दोस्ती कर ली ! खुद खाक होने की, साज़िश कर ली !! इन सर्द बर्फ़ीली हवाओं में, वो बात कहाँ ! एक धूप की ख्वाहिश में, रोशनी कर ली !! तेरे दामन में, या मेरे आशियाने में ! एक बूँद की चाहत में, बारिश कर ली !! वो तो नहीं हुआ जो, दिल की आरज़ू थी ! हर शाम
24 मई 2017
24 मई 2017
अश्क तो हैं तेरी यादों के, मेरे लिए काफ़ी हैं !कुछ गुज़रे दिन इनके सहारे, गुजर जाएँगे जो बाकी हैं !!तेरी तस्वीर थी जो आँखों में, इसमे अब पानी का रंग शामिल है !ये धुंधली सी हो गयी है, बस अब थोडा सा रंग बाकी है !!म
24 मई 2017
24 मई 2017
जिसकी मिट्टी में ममता है, आँचल प्यार का साया है ! प्रेम प्यार से सनी हुई, जिसकी अद्भुत छाया है !! यहीं आके हमको चैन मिले , यह कैसी तेरी माया है ! हम धन्य हुए माँ, प्यार तेरा हमने पाया है !! हर पल हर छन तूने, हमारा साथ निभाया है ! हम धन्य हुए तूने , हमको सीने से लगाया
24 मई 2017
24 मई 2017
कहते हैं कुछ लोग की, ये अंदाज़ शायराना है ! कहते हैं हम की, अब ठीक से पहचाना है !! दिल की तन्हाई का, अब तो ये ही अफ़साना है ! कहते हो फिर क्यूँ के, ये तो बस बहाना है !! फिर वही दिन, वही रोशनी, वही आसमा है ! जाने क्यूँ फिर भी यहाँ, कुछ तो विराना है !! वो मोहब्बत कहाँ
24 मई 2017
24 मई 2017
कुछ खत मेरे नाम, बेनाम चले आएहम आज तेरी महफ़िल से, गुमनाम चले आएकुछ वक़्त तेरे साथ, कुछ लम्हे तेरे नामतेरी दोस्ती की गफलत में, हर शाम चले आएनाचीज़ समझते हो, बड़े शौक से समझोफिर भी मेरे नाम, कुछ इल्ज़ाम चले आए
24 मई 2017
15 मई 2017
तु
कभी बनारस की सुबह बन जाती हो। तो भोपाल की शाम हो जाती हो। तुम रास्तें के दृश्य हो या, दोनों पर एक आसमां। तुम चेतन की किताब का किरदार तो नहीं हो, तुम जो हो हमेशा हो। चार कोनो में नहीं होती तुम, तुमने ही तुम्हें रचा हैं। अब प्रेम का क्या वर्णन करूँ, मेरा प्रेम तो तुम्ह
15 मई 2017
03 जून 2017
वो
वो मुस्कुरा रहे हैं पर, आँखें कुछ और ही बयान कर रही हैं दुनिया के लिए खुश है, पर दुखों का सागर दिल में छुपा रखा है पूँछा जब उनसे इसका सबब,तो बोले इसको छुपा ही रहने दीजिए हुमने कहा उनसे, माना की सब आपकी निगाहो, पढ़ नहीं सकतेपर जो समझते हैं दिल का हालउनके सामने इन निगाहों को भी मुस्कुराना सिखा
03 जून 2017
25 मई 2017
एक छोटा सा प्रयास आप सभी दोस्तों के लिये, आशा करता हूँ आपको पसंद आएगाकुँवर दीपक रावत
25 मई 2017
25 मई 2017
हर चीज़ की कीमत तय कर दी, उन लम्हों की कीमत क्या होगी !जो साथ हँसे, जो साथ जिए, उन रिश्तों की कीमत क्या होगी !!क्यूँ भूल गये उस बचपन को, उन नन्ही आँखो के सपनो को !वो कैसे तुम अब पाओगे, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !क्यूँ भूल गये उन कसमो को, उन छोटी छोटी सी रस्मो को !वो कैसे तु
25 मई 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x