वक़्त

25 मई 2017   |   कुँवर दीपक रावत   (97 बार पढ़ा जा चुका है)

 वक़्त

हर चीज़ की कीमत तय कर दी, उन लम्हों की कीमत क्या होगी !
जो साथ हँसे, जो साथ जिए, उन रिश्तों की कीमत क्या होगी !!

क्यूँ भूल गये उस बचपन को, उन नन्ही आँखो के सपनो को !
वो कैसे तुम अब पाओगे, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !

क्यूँ भूल गये उन कसमो को, उन छोटी छोटी सी रस्मो को !
वो कैसे तुम अब पाओगे, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !!

क्यूँ सोचते हो जो बीत गया, अब भी कुछ तो बाकी है !
कुछ तो अब भी साथ है, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !!

हर चीज़ की कीमत कर लोगे, पर वक़्त नहीं मिल पाएगा !
ये आज नहीं मिल पाएगा, जिसकी कोई कीमत ही नहीं !!

Waqt – Deepak Rawat

https://deepakrawat.wordpress.com/mypoems/waqt/

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रेणु
25 मई 2017

अच्छी रचना

बहुत बहुत धन्यवाद रेणु जी

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