"शून्य" 'आत्म विचारों का दैनिक संग्रह' "दुःख"

31 मई 2017   |  ध्रुव सिंह -एकलव्य-   (112 बार पढ़ा जा चुका है)

"शून्य" 'आत्म विचारों का दैनिक संग्रह' "दुःख"

"दुःख"

"अपूर्ण इच्छाओं की सूक्ष्म , रंध्रयुक्त पेटिका है जो समय-समय पर रिसती रहती है , निकलती इच्छायें दुःख रूपी अनुभव में परिणीत होती हैं"


"एकलव्य"

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