"शून्य" 'आत्म विचारों का दैनिक संग्रह' "क्रोध"

01 जून 2017   |  ध्रुव सिंह -एकलव्य-   (145 बार पढ़ा जा चुका है)

"शून्य" 'आत्म विचारों का दैनिक संग्रह' "क्रोध"

" क्रोध "

"हमारे शरीर में उत्पन्न क्षणिक विकृति मात्र है, जो आवेग के रूप में प्रस्फुटित होती है, दिशाविहीन होना इसका विशिष्ट लक्षण है जो हमारे मस्तिष्क को क्षणभर के लिए शक्तिहीन बना देती है"



"एकलव्य"

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