आंदोलन की आग

09 जून 2017   |  रवि रंजन गोस्वामी   (198 बार पढ़ा जा चुका है)

आंदोलन की आग

कुर्सी गयी धंधा गया ,

हो गये जो बेकार ,

आग लगाते फिर रहे ,

नेता हैं दो चार ।

इनके घर भी फुकेंगे ,

दिन ठहरो दो चार

इनको इतनी समझ नहीं,

आग न किसी की यार ।


अगला लेख: फसाद



Kokilaben Hospital India
08 मार्च 2018

We are urgently in need of kidney donors in Kokilaben Hospital India for the sum of $450,000,00,For more info
Email: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
WhatsApp +91 779-583-3215


अधिक जानकारी के लिए हमें कोकिलाबेन अस्पताल के भारत में गुर्दे के दाताओं की तत्काल आवश्यकता $ 450,000,00 की राशि के लिए है
ईमेल: कोकिलाबेन धीरूभाई अस्पताल @ gmail.com
व्हाट्सएप +91 779-583-3215

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
31 मई 2017
मु
मुफ़लिसी में सब ने दामन छोड़ दिया दोस्त नज़रें चुरा कर निकल जाते हैं अपने भी अजनबी लगते हैं रिश्तों में दूरियाँ आ गयी है फिर दिल को समझता हूँ किसी से क्यों गिला करता है तेरी ख़ुद की परछाईं तेरा साथ छोड़ देती है रात के अंधेरे में तो इस जहान से क्यों उम्मीद रखता हैतेरा साथ देने की
31 मई 2017
29 मई 2017
हाल पूंछते हैं ,कि भड़काते हैं ?बाहर ही रहने दो ,जो हालपुर्सी को ,चले आते हैं । कोई मरहम ही इनके पास नहीं ;जख्मों पे नमक छिड़क के ,चले जाते हैं ।
29 मई 2017
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x