गर्मी तो बढ़ी है...

14 जून 2017   |  सौम्य स्वरूप नायक   (179 बार पढ़ा जा चुका है)

गर्मी तो बढ़ी है...

आज mercury फ़िर से हाई है ,

लगता है गर्मी फ़िर से बढ़ी है ,

रोज़ चाय से दिल लगाने बाले ,

आज लस्सी को तलाश रहे हैं ,

तो सर पर टोपी, आँखों पर चश्मा ,

बना आज शहर का trend है,

रोज़ आसमान को चीरते पंछियों की टोली ,

फब्बारौन को  ढूंढ़ती जा पहुँची है ,

तो जानवरों इंसानों में छाँव खोजने की ,

लगी अजीब सी होड़ है.. ,

अचानक लगी curfew सी देखो ,

सड़कें हो रही आज  खाली है ,

वाकई गर्मी तो बढ़ी है !  ॥1॥


सियासत की गलियारों में भी गर्मी बढ़ी है ,

सुना है वहाँ करप्शन कि लू चली है ,

खुद को बचाए कैसे ,इसलिए धरम और विकास का ओढा छाता चुनावी है ,

मतलब गर्मी तो बढ़ी है ,

Exams का महासागर आगे है ,पार करने की होड़ में 

लगा हर student है ,

रट रहा है ,दिमाग में बैठाने की जगह ठूंस रहा है ,

क्या करे ! Cutoff का पारा जो हाई है ,

गर्मी हां भी बढ़ी है  ॥2॥

पर इन सब मे टेंशन दे रही गर्मी जो यहाँ बढ़ी है ,

जो इंसानियत को मोम के पुतले सी पिघला रही है 

क्रोध स्वार्थ के इस आग बरसाते तापमान मे ,

विवेक भी अब जल रही है ,

लग रहा है ऐसा अब ,

मनो इंसान लगा रह अपनी ही चिता पर आग है ,

न दिख रहा बचने का रास्ता  अब कोई ,

भगवान ! अब तू ही सहारा है  ॥3॥


SOUMYA SWARUP NAYAK

Sambalpur, Odisha



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