आहिस्ता से पढना... ( एक वाक्य भी दिल में बैठ गया तो जीवन सुधरेगा )

07 जुलाई 2017   |  इंजी. बैरवा   (307 बार पढ़ा जा चुका है)

आहिस्ता से पढना... ( एक वाक्य भी दिल में बैठ गया तो जीवन सुधरेगा ) - शब्द (shabd.in)

मैं रूठा,

तुम भी रूठ गए

फिर मनाएगा कौन... ?

आज दरार है,

कल खाई होगी

फिर भरेगा कौन... ?

मैं चुप ,

तुम भी चुप

इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन... ?

छोटी बात को लगा लोगे दिल से ,

तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन... ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर ,

सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन... ?

न मैं राजी ,

न तुम राजी ,

फिर माफ़ करने का बड़प्पन

दिखाएगा कौन... ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,

तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन... ?

एक अहम् मेरे अंदर,

एक तेरे भीतर भी ,

इस अहम् को फिर हराएगा कौन... ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए !

फिर इन लम्हों में अकेला

रह पाएगा कौन... ?

मूँद ली दोनों में से गर किसी दिन

एक ने आँखें....

तो कल इस बात पर फिर

पछतायेगा कौन... ?

*********

( एक दूसरे का सम्मान करें.... गलतियों को अनदेखा करें.... अहम को त्यागे... )

[ Respect Each Other… Ignore Mistakes… Avoid Ego]

आपका जीवन मंगलमय हो ।

( व्हाट्स अप से साभार उद्धर्त )

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रवि कुमार
08 जुलाई 2017

अच्छी बात को बेहद अच्छे ढंग से समझा दिया

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