ढिश्कयाऊँ.... ढिश्कयाऊँ.... !! (माप में रहना, हमारा साहब विदेश से आने के बाद, ‘हूँकारेंगे’ तो तुम्हारे ड्रेगन की हवा निकल जाएगी !!!)

08 जुलाई 2017   |  इंजी. बैरवा   (83 बार पढ़ा जा चुका है)

ढिश्कयाऊँ.... ढिश्कयाऊँ.... !! (माप में रहना, हमारा साहब विदेश से आने के बाद, ‘हूँकारेंगे’ तो तुम्हारे ड्रेगन की हवा निकल जाएगी !!!)  - शब्द (shabd.in)

सितम्बर 2014 में जब चीन के राष्ट्र प्रमुख शी जिनपिंग अहमदाबाद पधारे, खाने-पीने और रिवर-फ्रंट पर मजा करने के बाद, चीन पहुँचने पर एक मणिनगर निवासी और रेलवे से निवृत अधिकारी अधराभाई द्वारा अहोभाग्य पूर्ण पत्र लिखा था । पत्र में उनके द्वारा लिखा गया था कि, अहमदाबाद आते-जाते रहना क्योंकि आपके आने-जाने से रास्ते एकदम अच्छे / साफ सुथरे हो जाते है और रातोरात अहमदाबाद की झोपड़ पट्टियाँ परदे के पीछे अदृश्य हो जाती है । आजकल सीमा पर थोड़ी सी असहनीय घटनाओं के कारण अधराभाई का माथा छटक गया तथा चीनी राष्ट्रप्रमुख को फिर से जबरदस्त चीनी भाषा में अनुवाद करके पत्र लिखकर पोस्ट-बॉक्स में डाल दिया । अधराभाई का ओरिजनल पत्र आपके लिए –

अरे जिनपिंग्या,

(उपरोक्त बेअदब सम्बोधन पढ़कर आप आघात में मत पड़ना,तुम इस अशिष्टता के योग्य हो । पहले पत्र में प्रिय जिनपिंगभाई लिखा था किन्तु वर्तमान की घटनाओं के बाद, आप इस बेअदब सम्बोधन के लायक ही हो और इस बेअदबी सम्बोधन की स्पष्टता के बाद पत्र की शुरुआत करता हूँ ।)

उम्मीद रखता हूँ कि, आपके देश, परिवार के सदस्य, जानवर और ड्रेगन, समस्त कुशल मंगल होंगे तथा आप अपनी मानसिक बीमारी की दवा नियमित रूप से लेते होंगे । आप और आपकी श्रीमति, वर्ष 2014 के सितम्बर माह में हमारे अहमदाबाद शहर में 5 घंटे के लिए पधारे और उस मुलाक़ात के दृश्यों को लगातार तीन दिनों तक टेलीविज़न में देखकर हम बहुत आनंदित हुए । ...आपके साथ आत्मीयता बढ़ी । आप अहमदाबाद में घूमें फिरे, नास्ते-पानी का आनंद लिया, रिवर-फ्रंट पर खाना खाया, मोदी जी के साथ-साथ झूले पर झूले... ये सभी गतिविधियाँ आज भी हमारे संस्मरणों में ताजा है । आप आए उस समय लद्दाख के चुनार विस्तार की सीमा पर, आपके सैनिकों द्वारा हमारे सैनिको को धमकी दिए जाने के बावजूद भी हमारे मोदी साहब ने दिल बड़ा रखते हुए, अनिच्छा से ढोकला खाने का आग्रह किया । आपने ना-ना करते हुए भी थोकबंद मात्रा में झपट्टा मार के ढोकलाखा गए । वैसे भी मुफ्त का मिले तो, आप कहाँ छोड़ते हो ! आपकी छोटी-छोटी आँखों वाले सैनिको की सेना द्वारा सिक्किम में, हमारे सेना के साथ जो हरकत किया गया है, तब यह कहने का मन होता है कि, जिन ढोकलों का आपके द्वारा दोगले मुँह से खा लिया गया, वे तीन दिन के बासी थे, वैसे भी वे बासी ना होते तो, आप साँप और मेंढक पचा सकने वाले लोगों को, बासी ढोकले भी अच्छे ही लगे होंगे !

पत्र लिखने के पीछे मेरा आशय यह है कि, आपके द्वारा सीमा पर जो हरकत/आचरण किया गया है, यह अच्छा नहीं है । हमारे साहब द्वारा आपको जो खुशी-खुशी “चीनी कम (Come), चीनी कम” कहकर और आमंत्रण देकर रास-गरबा दिखाकर मनोरंजन करते है और आप सिक्किम में हमारी सेना के बंकरों को उड़ा देते हो ! हमारी कैलाश मान-सरोवर की यात्रा को बंद कर देते हो !! हमे रोज-रोज धमकियाँ देते हो !!! हमे रोज किसी भी प्रकार से थप्पड़ मारते रहते हो !!!! इस बारे में हमारे जेटली साहब कुछ धीरे-धीरे बोलते है और उसके दूसरे दिन चढ़कर युद्ध की धमकी देते हो, यह कौनसा तरीका है ? वह भी ऐसे समय में जब हमारे साहब विश्व-भ्रमण कर रहे हों... आपको भली प्रकार से मालूम ही होगा कि, हमारे साहब को घूमने-फिरने का कितना शौक है । हिन्दू हृदय सम्राट, प्रखर राष्ट्रवादी, धुरंधर अर्थशास्त्री, महा विज्ञानी मोदी साहेब जैसे कर्मशील महामानव अपनी बहु संस्कृति/सम्पत्ति सहित घूमने का शौक पूरा कर रहे हो, ऐसे अंतिम चरण में, आपको इतनी निम्न कक्षा की हरकत नहीं करनी चाहिए । यह तो आपके द्वारा हवन में हड्डीडालने जैसा काम किया जा रहा है, जबकि आपके मूर्ख जंगली ड्रेगन द्वारा भी इस प्रकार की कार्यवाही की उम्मीद नहीं थी ।

आप अच्छी प्रकार से जानते है कि, हमारे साहब कितने भोले है, दो शब्द मीठे बोल और तीन चार मुलाक़ात कर लो... तो खुश हो जाते है । आपसे तो वह ट्रम्प अच्छा है; अच्छा लगे या न लगे, फिर भी तीन बार गले मिले और ऊपर से काम्प्लीमेंट भी मिला कि, मोदी साहब अर्थतंत्र के बहुत जानकार है (यह परम सत्य भी है) । इज़राइल के नितिनभाई याहू ने “मेरे दोस्त” कहा, बस हमारे साहब खुश हो गए । हमारे साहब ऐसा कभी भी विचार नहीं करते है कि, यदि कल इज़राइल के पास से हथियार ना भी खरीदें तो दोस्त, दोस्त ना रहा” गाने का भी समय आ जाए... । चीनी भाई आप दुख में दो शब्द मीठे ना बोल सको तो कोई बात नहीं किन्तु ऐसी अवड-चंडाई तो मत करो... हम कुछ नहीं बोलते इसका मतलब यह नहीं है कि, आप सिर पर चढ़कर ताण्डव करो... ! हमारा सिक्किम, अरुणाचल, लद्दाख कोई थाली में परोसा हुआ ढोकला नहीं है कि, आप ऊंठाकर मुँह में डाले और निगल जाए... !!

हमारे साहब के मुँह से अक्सर मीठे बोल ही निकलते है, इसलिए उनकी ओर से, मै आपको चेतावनी देता हूँ कि,“माप में रहना, हम इन हरकतों को बर्दास्त नहीं करेंगे” हमारे साहब भले ही भोले दिखते है, किन्तु अंदर से “गुजरात के शेर” है । इसलिए भारतीय क्षेत्र में बद-दानत करना बंद करो... !! हमारा शेर अमेरिका, पुर्तगाल, स्पेन, इज़राइल और जर्मनी से वापस लौटने के बाद, एक हुंकार करेंगे तो, तुम्हारे ड्रेगन की हवा निकल जाएगी... !!! आप शी हो या ही’… आई डोंट केयर.... जिनपिंग भाई सुधर जाओ... नहीं तो जब आप वापस अहमदाबाद आओगे तो “ढीकावाडी” अवश्य ही होगी ।

आप, आपकी घरवाली, बच्चे, पड़ोसी, पालतू कुत्ते.... समस्त लोग जाओ तेल लेने... ।

बस इतना ही ...

लिखी,

अधराभाई शाह (मणिनगर वाला),



(courtesy:http://epaper.navgujaratsamay.com/details/20281-25741-2.html)

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