क्या आप जानते हैं ???

11 जुलाई 2017   |  इंजी. बैरवा   (140 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या आप जानते हैं ??? - शब्द (shabd.in)

आज हमारी रसोई में पकने वाली तक़रीबन हर सब्जी आलू के साथ जुड़कर खाने के ज़ायके को दोगुना कर देती है । इसके अलावा आलू के पराठे सहित कई अन्य व्यंजन ों में आलू प्रमुख है । गूगल डूडल के ज़रिए गूगल अपने अनोखे अंदाज़ में अपने यूज़र्स को दुनिया की कुछ चीज़ों से रूबरू करवाता है । सोमवार (10 जुलाई) को गूगल ने अपने डूडल को आलू से बनाया । ऐसा इसलिए क्योंकि आज ही के दिन 10 जुलाई, 1724 को काउंटेस ईवा एकेब्लड का जन्मदिन होता है । यह उनका 293वां जन्मदिन है, जिसे गूगल भी अपने अंदाज में सेलिब्रेट कर रहा है । गूगल ने एक कैरिकेचर बनाया है, जिसमें गूगल की स्पेलिंग आलू और उसके छिलकों से पूरी की गई है । काउंटेस ईवा एकेब्लड एक स्वीडिश महान कृषि वि ज्ञान ी'> कृषि विज्ञान ी थीं, जिन्होंने आलू से स्टार्च निकालने का तरीका ढूंढ़ा था । यही नहीं आज जो आप स्टार्च फ्री बेकिंग का इस्तेमाल करते हैं, वो भी उनकी ही देन है । इसके अलावा उन्होंने वोदका, मूनशाइन और पोटैटो वाइन जैसे अल्कोहल बनाया । इससे पहले लोग अनाज से अल्कोहल बनाते थे । एकेब्लड की खोज के बाद अनाज से अल्कोहल बनाने की वर्षों पुरानी प्रथा खत्म हो गई और अल्कोहल बनाने के लिए अनाजों के स्थान पर आलू का प्रयोग होने लगा । स्वीडेन में आलू सबसे पहले 1658 में आया । इससे पहले इसे सिर्फ जानवरों के खाने लायक समझा जाता था और इंसान इसका सेवन नहीं करते थे । 1746 में ईवा ने एक लम्बे शोध के बाद यह बात पता लगाई कि आलू को सब्जियों के रूप में प्रयोग करने के साथ उसे सुखाकर और पीस कर आटे के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है । 24 वर्ष की आयु में ईवा ने अपनी इस खोज को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रस्तुत किया । ईवा इस एकेडमी से जुड़ने वाली पहली महिला सदस्य थीं । 1786 में ईवा के मृत्यु के बाद, रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 1951 तक किसी भी महिला सदस्य को नहीं चुना है । आलू के उपयोग से आटा और अल्कोहल बनाने के लिए एकेब्लड को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज में भर्ती किया गया । रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज में स्थान पाने वाली वो पहली महिला थीं । स्वीडन में पहली बार साल 1658 में आलू आने शुरू हुए । तब लोग इसे इंसानों के खाने लायक नहीं मानते थे और जानवरों को खिलाने के लिए इस्तेमाल करते थे । एकेब्लड ने आलू की खेती की और उस पर एक्सपेरिमेंट शुरू कर दिया । साल 1746 में एकेब्लड ने यह खोज किया कि जानवरों को खिलाए जाने वाली इस सब्जी से आटा बनाया जा सकता है । 24 साल की एकेब्लड ने अपनी खोज को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज में जमा किया और इसके बाद उन्हें इस प्रतिष्ठिबत संस्थान में भर्ती कर लिया गया । इस खोज ने स्वीडेन के खाद्य संकट को खत्म करने में मदद की । एकेब्लड ने ये सुना था कि जर्मनी में आलू से अल्कोहल बनाई जाती है । इसके आधार पर एकेब्लड ने आलू से अल्कोहल जैसे कि वोदका, मूनशाइन और पोटैटो वाइन आदि बनाया । इससे पहले लोग अनाज से अल्कोहल बनाते थे । एकेब्लड की खोज के बाद अनाज से अल्कोहल बनाने की वर्षों पुरानी प्रथा खत्म हो गई और अल्कोहल बनाने के लिए अनाजों के स्थान पर आलू का प्रयोग होने लगा । साल 1786 में एकेब्लड का देहांत होने के बाद रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने साल 1951 तक किसी भी दूसरी महिला का चुनाव नहीं किया ।

अगला लेख: मेरी पहचान... मेरा झंडा....



रवि कुमार
11 जुलाई 2017

अच्छी जानकारी , बैरवा जी

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